सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बताया ‘भारत की ऊर्जा रणनीति का प्रमुख स्तंभ’, नकारात्मक दावों का खंडन

 


नई दिल्ली, 05 जुलाई (हि.स.)। केन्द्र सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम भारत की ऊर्जा रणनीति का प्रमुख स्तंभ है। इसकी प्रगति वैज्ञानिक मूल्यांकन, चरणबद्ध कार्यान्वयन और सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को दर्शाती है। कार्यक्रम ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत, उत्सर्जन को कम और किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा किए हैं। इसने कच्चे तेल के आयात को भी कम किया है और घरेलू स्तर पर उत्पादित नवीकरणीय ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया है। ईबीपी कार्यक्रम स्वच्छ, अधिक लचीले और आत्मनिर्भर परिवहन ईंधन पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देना जारी रखेगा।

उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर लगातार एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर विभिन्न नकारात्मक दावे सामने आ रहे हैं। इन दावों में कहा जा रहा है कि एथेनॉल से गाड़ियों को नुकसान हो रहा है, जल संसाधन पर दवाब बढ़ रहा है और कार्यक्रम से लाभ होने की बजाय हानि हो रही है। इसी को लेकर पत्र सूचना कार्यालय ने विस्तार से दावों का खंडन करते हुए स्थिति स्पष्ट की है।

इन दावों पर स्पष्टीकरण देते हुए विस्तार से एक-एक दावे का खंडन किया गया है। सरकार का कहना है कि भारत अपनी खपत का लगभग 88.5 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। विदेशों से खरीदा गया तेल का प्रत्येक बैरल देश को मूल्य में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में अचानक होने वाली समस्याओं के जोखिम में डालता है, जिन पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता। भारतीय गन्ने, मक्का और चावल से उत्पादित एथेनॉल घरेलू संसाधनों का उपयोग करके इस जोखिम को कम करने का एक तरीका प्रदान करता है।

सरकार के मुताबिक 2014-15 से विदेशी मुद्रा में 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। 310 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल का विकल्प का विकल्प तैयार हुआ है। करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आई है। वहीं, किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय हुई है।

सरकार ने प्रश्नोत्तर के माध्यम से एथेनॉल से जुड़े दावों का खंडन और स्थिति स्पष्ट की है-

दावा - ई20 ईंधन से माइलेज 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

स्थिति - 30 प्रतिशत का आंकड़ा केवल पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल के कम कैलोरी मान को दर्शाता है, न कि वास्तविक माइलेज में गिरावट को। माइलेज ईंधन के प्रकार की तुलना में ड्राइविंग की आदतों, टायर के दबाव, सर्विसिंग और एसी लोड पर कहीं अधिक निर्भर करता है।

दावा- ई20 इंजनों विशेषकर पुराने इंजनों को नुकसान पहुंचाता है ।

स्थिति -ई20 के लॉन्च के बाद से इससे संबंधित इंजन फेलियर का कोई व्यापक मामला सामने नहीं आया है। ई20 को एसआईएएम, एआरएआई और आईओसीएल द्वारा वाहन निर्माताओं के साथ व्यापक परीक्षण के बाद ही मंजूरी दी गई थी।

दावा - इथेनॉल उच्च-प्रदर्शन वाला ईंधन नहीं है और वाहन के प्रदर्शन को कम करता है।

स्थिति -इथेनॉल एक उच्च-ऑक्टेन ईंधन है, जिसका शोधित ऑक्टेन नंबर लगभग 108.5 है, जबकि पेट्रोल का 84.4 है। ई20 भारतीय पेट्रोल की प्रभावी ऑक्टेन रेटिंग को लगभग 95 तक बढ़ा देता है, जिससे आधुनिक इंजनों में दहन बेहतर होता है। ई20 के लिए कैलिब्रेट किए गए वाहन बेहतर त्वरण, सुचारू प्रदर्शन और कम उत्सर्जन प्रदान कर सकते हैं।

दावा - बीमा कंपनियाँ ई20 से संबंधित नुकसान के दावों को अस्वीकार करती हैं।

स्थिति -बीमाकर्ताओं और निर्माताओं ने स्पष्ट किया है: भारत में ई20 का बीमा या वारंटी की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। एसआईएण ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि विनिर्देशों के अनुरूप ई20 पर चलने वाले वाहनों की वारंटी मान्य होगी।

दावा - इथेनॉल मिश्रित ईंधन सस्ता होना चाहिए लेकिन सरकार इसका लाभ उठा रही है।

स्थिति -इस दावे के लिए उद्धृत नीति आयोग की रिपोर्ट 2020-21 की है, जब इथेनॉल वास्तव में पेट्रोल से सस्ता था। तब से इथेनॉल की खरीद लागत परिष्कृत पेट्रोल की लागत से अधिक हो गई है, फिर भी ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण और कृषि आय में वृद्धि के कारण इसका उपयोग अनिवार्य बना हुआ है।

दावा - सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि ई20 केवल एक 'प्रयोग' है।

स्थिति -यह मामला इथेनॉल खरीद अनुबंधों से संबंधित था- ई20 के गुणों से नहीं। अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने 30.06.2026 को स्पष्ट किया कि 'प्रयोग' का दावा गलत है।

दावा - गन्ने का रस सचमुच पेट्रोल में मिलाया जाता है।

स्थिति -पेट्रोल में कच्चे रस को मिलाते हुए वायरल वीडियो भ्रामक हैं। इथेनॉल किण्वन और औद्योगिक प्रक्रियाओं द्वारा उत्पादित होता है, जिससे इसके गुण पूरी तरह बदल जाते हैं और मिश्रण से पहले इसे ईंधन की गुणवत्ता के सख्त मानकों को पूरा करना आवश्यक है।

दावा - 1 लीटर इथेनॉल के उत्पादन में 10,000 लीटर पानी की खपत होती है।

स्थिति -एक इथेनॉल संयंत्र प्रति लीटर इथेनॉल के लिए केवल 3-5 लीटर संसाधित पानी का उपयोग करता है। आधुनिक डिस्टिलरी शून्य तरल निर्वहन प्रणाली (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) का उपयोग करती हैं। धान की खेती के संपूर्ण कृषि जल पदचिह्न को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है। केवल अतिरिक्त चावल, जिसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद डीएफपीडी द्वारा निर्धारित और अनुमति दी जाती है, को ही इथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है।

दावा - ई20 में चीनी होने के कारण चींटियाँ और मधुमक्खियाँ ईंधन के ढक्कनों पर झुंड बनाकर जमा हो जाती हैं।

स्थिति -ईथेनॉल ईंधन का आसवन किया जाता है- अवशिष्ट शर्करा को हटा दिया जाता है। इसमें कीट-विकर्षक विकृतीकरण पदार्थ होते हैं, पेट्रोल की गंध हावी होती है और ई20 सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम वाष्प उत्पन्न करता है।

दावा - इथेनॉल की जल-अवशोषित करने की प्रकृति ईंधन को खराब कर देगी और टैंकों को बर्बाद कर देगी।

स्थिति -किसी भी ईंधन टैंक में पानी का प्रवेश रोकना, चाहे उसमें इथेनॉल मिला हो या नहीं, वाहन डिजाइन का मूलभूत हिस्सा है। आधुनिक वाहनों में ईंधन टैंक में पानी के प्रवेश को रोकने के लिए कई डिजाइन विशेषताएं और सुरक्षा उपाय मौजूद होते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा