कच्छ के रण में 100 से अधिक मानव कंकाल मिलने का दावा, प्राचीन बस्ती के अवशेष भी मिले

 




भुज, 08 अगस्त (हि.स.)। पाकिस्तान सीमा के समीप कच्छ के रण में कच्छ विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के संयुक्त शोध के दौरान 100 से अधिक मानव कंकाल मिलने से पुरातत्व एवं इतिहास के क्षेत्र में उत्सुकता बढ़ गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, एक ही दिशा में दफनाए गए मानव अवशेषों के साथ मौके से प्राचीन मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा की वस्तुएं, दीपक, तांबे के सिक्के, खिलौने और निर्माण अवशेष भी मिले हैं।

शोधकर्ताओं ने इस स्थल को फिलहाल ‘बरबादपुर’ नाम दिया है। प्रारंभिक जांच में मिले मिट्टी के बर्तनों और अन्य सामग्री के आधार पर स्थल के 1,000 से 1,500 वर्ष पुराना होने का अनुमान लगाया जा रहा है। पुरातत्वविदों का मानना है कि अवशेषों की विविधता से संकेत मिलता है कि यहां कभी विकसित मानव बस्ती रही होगी।

कच्छ विश्वविद्यालय के भूविज्ञानी डॉ. गौरव चौहान के मुताबिक, इस स्थल की जानकारी पहली बार वर्ष 2024 में सीमा सुरक्षा बल के जवानों को गश्त के दौरान मिली थी। इसके बाद विश्वविद्यालय की टीम ने यहां शोध शुरू किया। बाद में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और डेक्कन कॉलेज विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों को भी शोध से जोड़ा गया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, आज जहां कच्छ के रण में रहना बेहद कठिन है, वहां प्राचीन काल में नदी के रेतीले पाट और मीठे पानी की उपलब्धता के कारण मानव बस्तियां विकसित रही होंगी। छोटे ऊंचे भूभागों पर लोगों के रहने तथा आसपास खेती किए जाने की संभावना भी जताई गई है।

शोध दल इस स्थल का संबंध सिंधु नदी के पुराने प्रवाह और कच्छ के प्राचीन मानव आवास से जोड़कर भी देख रहा है। धोलावीरा के बाद सिंधु नदी के प्रवाह में हुए बदलावों के कारण आबादी के दूसरे क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित होने की संभावना पर भी अध्ययन किया जा रहा है। प्रारंभिक शोध में इस स्थल के सुमरा राजवंश के काल से संभावित संबंध की भी जांच की जा रही है।

वर्ष 1819 के कच्छ भूकंप के बाद क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना और नदी के प्रवाह में हुए संभावित बदलावों ने जमीन के नीचे दबे अवशेषों को सतह के करीब ला दिया हो, इस संभावना की भी वैज्ञानिक जांच की जा रही है।

अब मानव अवशेषों और पुरातात्विक सामग्री की कार्बन डेटिंग, डीएनए विश्लेषण तथा अन्य वैज्ञानिक तकनीकों से जांच की जाएगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अनुमति मिलने के बाद स्थल पर विस्तृत उत्खनन किए जाने की योजना है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि आगे की वैज्ञानिक जांच से कच्छ के प्राचीन मानव इतिहास, सिंधु नदी के पुराने प्रवाह तथा क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिल सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे