भगवान राम के चित्रकूट में तपोवन वृक्ष मंदिर की स्थापना का संकल्प

 




चित्रकूट (उत्तर प्रदेश), 14 जुलाई (हि.स.)। भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट की पौराणिक देवल कुटी में तपोवन वृक्ष मंदिर की स्थापना का संकल्प लिया गया है। देवल कुटी 'देवल और चौरा गांव' के मध्य मंदाकनी नदी के तट पर एक पहाड़ीनुमा जगह पर स्थित है। पहाड़ी ब्लॉक स्थित यह कुटी अभी तक शहरी शोर-शराबा से दूर है। करीब डेढ़ दशक से यहां तप करे स्वामी धर्मानंद ने घोषणा की है कि वह देवल कुटी की चार बीघा जमीन पर तपोवन वृक्ष मंदिर तैयार कराएंगे।

स्वामी धर्मानंद को यहां आसपास के ग्रामीण तपस्वी बाबा कहकर भी संबोधित करते हैं। वह देवल में आने से पहले पयस्वनी के उद्गमस्थल बृह्मकुंड के पास वर्षों तक तपस्या कर चुके हैं। वह कहते हैं, '' देवल के तपस्वी संन्यासी उन्हें वृक्षों की जो सौगात सौंप गए हैं, वह समय के साथ-साथ धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। यहां चार बीघा जमीन है कुटी की। उसमें औषधीय और फलदार पौधे रोपित कर तपोवन वृक्ष मंदिर विकसित करना है, जिससे यहां आने वाले साधु-संन्यासी शांत और जीवंत वातावरण में साधना कर सकें। यह सारा काम श्रमदान से होगा।

उन्होंने कहा कि अगर जलऋषि और वृक्षमित्र अभिमन्यु भाई ठान लें तो उत्तर प्रदेश शासन से चार बीघा भूमि के लिए पौधे मिलने में कोई कठिनाई नहीं आएगी। चित्रकूट के रामघाट में अमावस्या स्नान का महत्व बताते हुए तपस्वी बाबा ने कहा कि गत दिवस उन्होंने देवल कुटी में अभिमन्यु भाई व अन्य से इस संबंध में गहन चर्चा की। तब तपोवन वृक्ष मंदिर का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि सरकार के वृक्षारोपण महा अभियान एवं एक पेड़ मां के नाम के अंतर्गत अगर यह संकल्प पूरा हो तो बहुत अच्छा रहेगा।

धर्मानंद ने कहा कि चित्रकूट भगवान राम की तपोभूमि है। वर्तमान में तपोवन क्षेत्र में हो रहे कंक्रीट के मंदिर एवं घाट निर्माण से तपोवन की प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान कमजोर हो रही है। इसलिए चित्रकूट तपोवन संरक्षण अभियान के स्वयंसेवकों ने वृक्ष मंदिर अवधारणा के तहत तपोवन पुनर्जीवन का संकल्प लिया है। तपस्वी बाबा ने कहा कि वह इस साल देवल कुटी में पवित्र माह क्वार (आश्विन) से तप साधना पर बैठेंगे। यह साधना अगले साल इसी माह पूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि वह देवल महर्षि की हजारों वर्ष पुरानी देवल कुटी के इस तपोवन के वृक्ष मंदिरों को सहेज रहे हैं यही उनकी पूजा है। वह अपने जीवन में एक और वृक्ष मंदिर तैयार करना चाहते हैं, जिससे यह तपोवन इस क्षेत्र के लिए ऑक्सीजन प्लांट की तरह दिखे। स्थानीय बच्चे यहां आएं और योग सीखें।

अभिमन्यु भाई का कहना है कि तपोवन पुनर्जीवन संवाद में संत एवं समाज को जोड़ने के लिए देवल कुटी, सूरजकुंड, कालका देवी पहाड़ी, कामदगिरि पर्वत परिक्रमा मार्ग, लक्ष्मण पहाड़ी और ब्रह्मकुंड में जल्द ही गोष्ठियों की शुरुआत की जाएगी। इसका मकसद है कि सरकार-समाज का रोपित एक भी पौधा सूखने न पाए और चित्रकूट में तपोवन संस्कृति पुनर्जीवित हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद