चिंतन शिविर में पीएम मोदी का मंत्रियों को संदेश: योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाएं, डिलीवरी पर दें जोर

 


नई दिल्ली, 24 सितंबर (हि.स.)।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिपरिषद के दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ के दौरान केंद्रीय मंत्रियों से सरकार की प्रमुख योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने को कहा। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से 40-45 प्रमुख सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लोगों तक पहुंचाने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

चिंतन शिविर में इस बात पर जोर रहा कि सरकार की योजनाओं की जानकारी केवल कागजों या सरकारी तंत्र तक सीमित न रहे, बल्कि आम लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचे। मंत्रियों से अपने-अपने क्षेत्रों में योजनाओं के बारे में लोगों को जागरूक करने और लाभार्थियों तक योजनाओं की वास्तविक पहुंच की स्थिति को समझने के लिए कहा गया।

प्रधानमंत्री ने योजनाओं के क्रियान्वयन में ‘डिलीवरी’ और परिणाम को महत्वपूर्ण बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कार्यक्रमों का अंतिम आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि उनका फायदा नागरिकों तक किस तरह पहुंच रहा है।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को मीडिया से बातचीत और जनता के साथ संवाद के दौरान विषयों की बेहतर समझ रखने की सलाह दी। मंत्रियों से कहा गया कि किसी मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बोलने से पहले उससे जुड़े तथ्यों, समस्याओं और सरकार के दृष्टिकोण का गहराई से अध्ययन किया जाए।

इसका उद्देश्य यह है कि मंत्री संबंधित विषयों पर तथ्यों के आधार पर स्पष्ट और प्रभावी संवाद कर सकें तथा सरकार की नीतियों और फैसलों को सही तरीके से जनता के सामने रख सकें।

चिंतन शिविर के दौरान मंत्रियों को अलग-अलग समूहों में चर्चा और विचार-विमर्श का अवसर मिला। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे दूसरे समूहों से मिली सीख, अपने अनुभवों और चर्चाओं के दौरान सामने आए विचारों को साझा करें।

चर्चा का फोकस केवल अलग-अलग सरकारी योजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा। इसमें मंत्रालयों के कामकाज, आपसी समन्वय, संवाद व्यवस्था और योजनाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाने के तरीकों पर भी विचार किया गया।

चिंतन शिविर में सामने आए विचारों को शासन व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार के रूप में लागू करने पर भी जोर दिया गया। इसके केंद्र में बेहतर परिणाम, मंत्रालयों के बीच समन्वय और नागरिकों की अधिक भागीदारी रही।

कुल मिलाकर, चिंतन शिविर में सरकार के कामकाज को केवल योजनाएं बनाने तक सीमित रखने के बजाय योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी, परिणामों की निगरानी और जनता के साथ बेहतर संवाद के जरिए शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सौरव राय