भारत में नवजात एवं शिशु मृत्यु दर में आई गिरावट: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट
नई दिल्ली, 18 मार्च (हि.स.)। भारत में नवजात एवं शिशु मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है। संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु अनुमान समूह द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में नवजात मृत्यु दर में 1990 से 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार 1990 में भारत की नवजात मृत्यु दर 57 थी, जो 2024 में घटकर 17 हो गई है।
5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 1990 के आंकड़ों से 79 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। साल 1990 में यह दर 127 थी, जबकि 2024 में घटकर 27 हो गई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अधिकांश बाल मृत्यु रोकथाम योग्य या इलाज योग्य हैं। भारत के द्वारा यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम, सुविधा-आधारित नवजात देखभाल और नवजात एवं शिशु रोगों का एकीकृत प्रबंधन जैसी पहलों के विस्तार ने बचपन में मृत्यु दर को काफी कम किया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नवजात शिशुओं की देखभाल में सुधार, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी, और स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स की स्थापना ने मृत्यु दर घटाने में अहम योगदान दिया है।
हालांकि, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। नवजात मृत्यु दर अब कुल बाल मृत्यु का बड़ा हिस्सा बन गई है। इसके अलावा समय से पहले जन्म, जन्म संबंधी जटिलताएं और ग्रामीण-शहरी असमानताएं चिंता का विषय हैं।
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के तहत भारत का लक्ष्य पांच साल के कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर को 25 प्रति 1000 और नवजात मृत्यु दर को 12 प्रति 1000 से नीचे लाना है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की यह प्रगति दिखाती है कि बड़े पैमाने पर लागू की गई स्वास्थ्य योजनाएं और लगातार प्रयास किस तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। भारत का मॉडल अब अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
पिछले दो दशकों में, भारत ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में बाल मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस तेज़ कमी में भारत जैसे देशों की भूमिका अहम रही है, जिनके प्रयासों में लक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, बेहतर संस्थागत प्रसव प्रणाली और टीकाकरण कवरेज का विस्तार शामिल है।
दक्षिण एशिया में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 2000 में 1,000 जीवित जन्मों पर 92 से घटकर 2024 में लगभग 32 हो गई है, जो बच्चों के स्वास्थ्य में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी