न्याय व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को पीड़ित के अनुरूप संवाद करना चाहिए : न्यायाधीश सूर्यकांत

 




- मप्र के इंदौर में दो दिवसीय 'वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस' का शुभारंभ

भोपाल/इंदौर, 08 अगस्त (हि.स.)। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, जहां क्षेत्र के हिसाब से समस्याएं बदलती हैं। इसलिए न्याय व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को पीड़ित की भाषा, व्यवहार और प्रकृति के अनुरूप ही संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि संवाद सही तरीके से न हो तो व्यक्ति अधिकारों से वंचित रह जाता है और व्यवस्था असफल मानी जाएगी। इसलिए सभी को समान अधिकार मिले, यह सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शनिवार को मध्य प्रदेश के इंदौर जिले आयोजित दो दिवसीय 'वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस' के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। यह दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस 'न्याय तक पहुँच बढ़ाने' विषय पर ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गई है। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्याय प्रक्रिया में सकारात्मक संवाद और व्यवहार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई पीड़ित न्याय की आस लेकर आता है तो संवेदनशील व्यवहार और उसकी भाषा में किया गया संवाद ही उसकी आधी परेशानी दूर कर देता है। उन्होंने डॉक्टरों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक चिकित्सक मरीज से शांत व सकारात्मक रूप से बात कर उसे ठीक होने का भरोसा दिलाता है, ठीक उसी तरह न्याय प्रणाली को भी पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। इसी तरह न्याय प्रक्रिया से जुड़े सभी विभागों और व्यवस्था के लोगों को पीड़ित से इस तरह संवाद करना चाहिए ताकि उसकी परेशानी कम हो।

अहिल्याबाई और विक्रमादित्य की न्याय परंपरा का मुख्यमंत्री ने किया जिक्र

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि न्याय की पर्याय रहीं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की नगरी इंदौर में इस राज्यस्तरीय सम्मेलन का आयोजन होना गर्व का विषय है। उन्होंने याद दिलाया कि देवी अहिल्याबाई और सम्राट विक्रमादित्य ने न्याय की स्थापना के लिए अपनों और प्रजा में कभी भेद नहीं किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंच परमेश्वर से लेकर भारत की पुरातन संस्कृति हमेशा न्याय आधारित रही है। वर्तमान में राज्य सरकार और न्यायपालिका मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक त्वरित और सुलभ न्याय पहुंच सके।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के संयुक्त तत्वावधान में 8 और 9 अगस्त को इस दोदिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस में उच्चतम न्यायालय व विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, केंद्र सरकार के कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), न्यायिक अधिकारी और विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों तक कानूनी सहायता की पहुंच को और अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत