उपराष्ट्रपति ने चिदंबरम पिल्लई की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

 


नई दिल्ली, 05 सितंबर (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को स्वतंत्रता सेनानी वीओ चिदंबरम पिल्लई की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

उपराष्ट्रपति ने एक्स पर लिखा, स्वतंत्रता सेनानी वीओ चिदंबरम पिल्लई की जयंती पर मैं इस महान देशभक्त को सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनका साहस, त्याग और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कप्पलोट्टिया तमिलन (तमिल नाविक) के रूप में स्नेहपूर्वक याद किए जाने वाले उन्होंने देश की सेवा के लिए सुख-सुविधाओं से भरे जीवन का त्याग कर दिया था। स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी के माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश व्यापारिक प्रभुत्व को चुनौती दी और स्वदेशी तथा आत्मनिर्भरता की भावना को सशक्त गति प्रदान की। भारत की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने असाधारण धैर्य के साथ कारावास और कठोर कठिनाइयों का सामना किया। आइए, एक सशक्त, समृद्ध, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लेकर उनकी स्मृति का सम्मान करें।

उल्लेखनीय है कि 5 सितंबर 1872 को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के ओट्टापिडारम में जन्मे चिदंबरम पिल्लई स्वतंत्रता सेनानी के साथ-साथ वकील, उद्योगपति और तमिल विद्वान भी थे। ब्रिटिश कंपनियों के व्यापारिक एकाधिकार को तोड़ने के लिए उन्होंने साल 1906 में 'स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी' की स्थापना की। उन्होंने तूतीकोरिन (थूथुकुडी) और कोलंबो के बीच पहली स्वदेशी भारतीय नाविक सेवा शुरू की।

चिदंबरम ने 1908 में तूतीकोरिन की कोरल मिल के मजदूरों को एकजुट करके ऐतिहासिक हड़ताल का नेतृत्व किया था। ब्रिटिश सरकार ने उनके स्वदेशी और राष्ट्रवादी कार्यों से नाराज होकर उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया और कठोर कारावास की सजा दी। जेल में उन्हें कोल्हू में बैल की तरह जोतकर यातनाएं दी गईं, जिसके कारण उन्हें 'सेक्किजुत्था सेम्मल' भी कहा जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी