छत्तीसगढ़ में बाल तस्करी के नेटवर्क पर निगरानी के लिए बनाया जा रहा है स्थायी ग्रिड

 


डॉ. वर्णिका शर्मा बाल सुरक्षा को दे रहीं नई धार

रायपुर, 05 अक्टूबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ में बाल तस्करी के खिलाफ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने निर्णायक अभियान छेड़ दिया है। इसके नेटवर्क पर निगरानी के लिए राज्य में स्थायी ग्रिड बनाया जा रहा है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में दंतेवाड़ा में चलाए गए साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब 120 बच्चों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराए जाने के बाद से इस दिशा में लगातार अभियान चलाने के साथ अहम रणनीति और ठोस योजनाएं बनायी जा रही हैं।

उल्लेखनीय है कि बस्तर के सुकमा, बीजापुर, कोंटा और ओडिशा सीमा से बच्चों को दूसरे राज्यों में भेजे जाने की सूचनाओं के बाद आयोग ने स्थानीय नेटवर्क सक्रिय किया। पुलिस और प्रशासन के साथ संयुक्त कार्रवाई कर बच्चों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया गया। अब अंतरराज्यीय सीमाओं पर बाल तस्करी रोकने के लिए स्थायी मॉनिटरिंग ग्रिड तैयार किया जा रहा है। दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के दूरस्थ गांवों में जनजातीय बच्चों और युवाओं के बीच काम कर चुकी डॉ. शर्मा का मानना है कि बाल अपराध और तस्करी की जड़ तक पहुंचकर समाधान तैयार करना जरूरी है।

आधी रात ऑपरेशन, तस्करों को सीधा संदेश

डॉ. शर्मा ने बताया कि इस प्रकरण में आयोग को सूचना मिली थी कि बच्चों को बहला फुसलाकर अथवा परिवारों की आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर दूसरे राज्यों में भेजने की तैयारी है। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ आधी रात संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था। कार्रवाई में करीब 120 बच्चे सुरक्षित बचाए गए। आयोग के अनुसार इस कार्रवाई ने बाल तस्करी से जुड़े नेटवर्क को कड़ा संदेश दिया है। बच्चों की सुरक्षा के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

10 माह से अटका दाखिला, आयोग ने खुलवाया पोर्टल

शिक्षा के अधिकार के मामलों में भी आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। ‘तोसुराम और कृष्णा’ के मामले में आरटीई के तहत पात्रता के बावजूद दोनों बच्चों का निजी स्कूल में दाखिला करीब 10 महीने से लंबित था। तकनीकी समस्या और पोर्टल बंद होने का हवाला दिया जा रहा था। आयोग के हस्तक्षेप के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तलब किया गया। बंद पोर्टल दोबारा खुलवाकर दोनों बच्चों का दाखिला कराया गया। अभिभावकों से ली गई अवैध फीस भी वापस कराई गई।

400 से अधिक स्कूलों में ‘शुचिता’ की निगरानी

किशोरियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए संचालित ‘शुचिता योजना’ के तहत प्रदेश के 400 से अधिक शासकीय स्कूलों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और इंसिनरेटर लगाए गए हैं। आयोग के निरीक्षण में कई संस्थानों में मशीनें खराब, पैड का स्टॉक समाप्त और संचालन व्यवस्था कमजोर मिली। आयोग ने सभी स्कूलों से मासिक रिपोर्ट लेना शुरू किया है। उद्देश्य प्रत्येक मशीन को कार्यशील रखना और किशोरियों को स्वच्छता सुविधा उपलब्ध कराना है।

बालश्रम उन्मूलन के लिए आयोग ने मास्टर प्लान तैयार किया है। प्रत्येक तीन महीने में सात दिनों तक प्रदेशभर में गोपनीय और आकस्मिक छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। रेस्क्यू किए गए बच्चों को अनिवार्य शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। उनके माता पिता को मनरेगा, आजीविका मिशन और राशन कार्ड जैसी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से दिलाना शुरू है। वहीं परिवार की आय का वैध आधार मजबूत कर बच्चों को दोबारा श्रम की ओर जाने से रोकने की रणनीति तैयार की गई है।

‘रक्षक’ से तैयार होंगे बाल अधिकार विशेषज्ञ

बाल संरक्षण क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी दूर करने के लिए आयोग ने ‘रक्षक’ नाम से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स शुरू किया है। एक वर्षीय पाठ्यक्रम प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों में संचालित है। विद्यार्थियों को पोक्सो एक्ट, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, बाल विवाह और बालश्रम कानूनों के साथ बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्ड और चाइल्ड केयर संस्थानों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर स्कॉच गोल्डन अवार्ड मिला है।

डॉ. शर्मा का कहना है कि शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान छत्तीसगढ़ के हर बच्चे का अधिकार है। आयोग का लक्ष्य सरकारी योजनाओं और नीतियों को बच्चों की सुरक्षित जिंदगी, बेहतर शिक्षा और सम्मानजनक भविष्य से जोड़ना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी