प्रधानमंत्री मोदी ने चारधाम यात्रा शुरू होने पर दी शुभकामनाएं

 


नई दिल्ली, 22 अप्रैल (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देवभूमि उत्तराखंड में श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने और चारधाम यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर देशभर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को पत्र लिखकर उनकी सुखद, सुरक्षित और मंगलमय यात्रा की कामना की है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा देश की आस्था, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे तीर्थस्थल सदियों से देश की सनातन परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को सुदृढ़ करते आ रहे हैं। इन यात्राओं के माध्यम से श्रद्धालु अपनी जड़ों से जुड़ते हैं और भारत की प्राचीन संस्कृति का अनुभव करते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष पत्र लिखा है। उन्होंने कहा, 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल चुके हैं, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट भी विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। हिमालय की गोद में बसे चारधाम हमारी अटूट आस्था और विश्वास के केंद्र हैं। आदि शंकराचार्य सहित महान संतों के प्रयासों से इन तीर्थों ने देश को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव का माध्यम भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य में पर्यटन, बुनियादी ढांचे और आध्यात्मिक सुविधाओं का तेजी से विकास हो रहा है। पिछले वर्षों में चारधाम यात्रा को अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास का पालन करें और प्रकृति व आध्यात्मिकता के साथ गहरा जुड़ाव महसूस करें। इससे यात्रा का अनुभव और अधिक सार्थक होगा।

प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से पांच संकल्प लेने का आग्रह किया है। इनमें तीर्थस्थलों पर स्वच्छता बनाए रखना, पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहना, सेवा और सहयोग की भावना को अपनाना, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना तथा यात्रा के दौरान अनुशासन और नियमों का पालन करना शामिल है। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने, नदियों को स्वच्छ रखने और स्थानीय परंपराओं का सम्मान करने की भी अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रद्धालु अपनी यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों से जुड़ें और उनके जीवन, संस्कृति और परंपराओं को समझने का प्रयास करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन संकल्पों के साथ की गई चारधाम यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुभव साबित होगी और देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर