चैत्र नवरात्र : काशी में नौ गौरी के पूजन की है अनोखी मान्‍यता, जानें कहां मौजूद हैं यह मंदिर

चैत्र नवरात्र में नौ गौरी और नौ दुर्गा दोनों के पूजन का मान है। देश में काशी में दोनों देवियों के पूजन का मान है। जहां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्‍मांडा, स्‍कंदमाता, कात्‍यायिनी, कालरात्रि, महागौरी, कल्‍याणी आदि दुर्गा मंदिरों में आस्‍था नवरा‍त्र में गुलजार रहती है। जबकि नौ गौरी निर्मालिका गौरी, ज्येष्ठा गौरी, सौभाग्य गौरी, शृंगार गौरी, विशालाक्षी गौरी, ललिता गौरी, भवानी गौरी, मंगला गौरी, महालक्ष्मी गौरी के पूजन की मान्‍यता है। 

 

काशी में नवरा‍त्र के दौरान नौ दुर्गा और नौ गौरी की अलग अलग मान्‍यता है। मगर दर्शन और पूजन का मान दोनों ही प्रकार की देवियों का है। काशी में शारदीय नवरात्र में नौ दुर्गा और चैत्र नवरात्र में नौ गौरी की पूजन की मान्‍यता है। अगर आप काशी में नवरात्र के मौके पर हैं तो आपको नौ दुर्गा ही नहीं बल्कि नौ गौरी के दर्शन पूजन का सौभाग्‍य प्राप्‍त हो सकता है। 

चैत्र नवरात्र में नौ गौरी और नौ दुर्गा दोनों के पूजन का मान है। देश में काशी में दोनों देवियों के पूजन का मान है। जहां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्‍मांडा, स्‍कंदमाता, कात्‍यायिनी, कालरात्रि, महागौरी, कल्‍याणी आदि दुर्गा मंदिरों में आस्‍था नवरा‍त्र में गुलजार रहती है। जबकि नौ गौरी निर्मालिका गौरी, ज्येष्ठा गौरी, सौभाग्य गौरी, शृंगार गौरी, विशालाक्षी गौरी, ललिता गौरी, भवानी गौरी, मंगला गौरी, महालक्ष्मी गौरी के पूजन की मान्‍यता है। 

नौ गौरी और नौ दुर्गा के मंदिर
नौ दुर्गा के अतिरिक्‍त नौ गौरी को सिद्ध करने के लिए अलग अलग आह्वान मंत्र भी हैं। नौ गौरी में प्रथम मुख निर्मालिका गौरी का मंदिर गायघाट स्थित हनुमान मंदिर में स्थित है। वहीं शक्ति के उपासक पहले दिन शैलपुत्री देवी का पूजन-अर्चन भी करते हैं। शैलपुत्री का मंदिर अलईपुर इलाके में स्थित है।

नवरात्र के दूसरे दिन ज्येष्ठा गौरी का दर्शन पूजन कर्णघंटा के सप्तसागर में किया जा सकता है। वहीं शक्ति के उपासक ब्रह्मचारिणी देवी का भी दर्शन-पूजन करते हैं। इनका मंदिर ब्रह्माघाट क्षेत्र में है।

तृतीय सौभाग्य गौरी देवी का विग्रह ज्ञानवापी क्षेत्र स्थित सत्यनारायण मंदिर के अंदर स्थित है। नव दुर्गा के क्रम में तीसरे दिन चंद्रघंटा का दर्शन-पूजन चौक क्षेत्र स्थित मंदिर में किया जा सकता है।

चतुर्थ शृंगार गौरी भगवती का विग्रह ज्ञानवापी परिसर में है। शक्ति के उपासक इस दिन कुष्मांडा देवी की आराधना दुर्गाकुंड क्षेत्र में मौजूद मंदिर में करते हैं। 

पंचम विशालाक्षी गौरी का विग्रह मीरघाट क्षेत्र में धर्मकूप इलाके में है। इस दिन स्कंद माता के रूप में बागेश्वरी देवी का पूजन अर्चन जैतपुरा इलाके में स्थित मंदिर में करने की मान्‍यता है।

षष्ठं ललिता गौरी का विग्रह ललिता घाट क्षेत्र में है। शक्ति के उपासक कात्यायनी देवी का दर्शन-पूजन संकठा गली में आत्म विशेश्वर मंदिर में करते हैं।

सप्तम् भवानी गौरी का विग्रह विश्वनाथ गली में श्रीराम मंदिर में है। शक्ति के उपासक कालरात्रि देवी का पूजन अर्चन कालिका गली में स्थित मंदिर में करते हैं।

अष्टम मंगला गौरी का मंदिर पंचगंगा घाट इलाके में है। वहीं शक्ति के उपासक इस दिन महागौरी की पूजा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप माता अन्नपूर्णा के मंदिर में करते हैं। 

नवम महालक्ष्मी गौरी की महालक्ष्मी गौरी के रूप में लक्सा क्षेत्र में लक्ष्मीकुंड पर पूजन की मान्‍यता है। शक्ति के उपासक इस दिन सिद्धदात्री देवी का दर्शन-पूजन कालभैरव मंदिर के पूर्व गोलघर इलाके में स्थित मंदिर में करते हैं।