छत्तीसगढ़ में विदेशी पेड़ ‘कोनोकार्पस’ के रोपण पर पूर्ण प्रतिबंध

 


रायपुर, 09 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माने जाने वाले विदेशी पेड़ ‘कोनोकार्पस’ के नए रोपण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही शहरों में पहले से लगे इन पेड़ों को हटाने और उनकी जगह देशी पौधे लगाने की योजना तैयार की गई है।

कोनोकार्पस की जगह अब नीम, पीपल, बरगद, करंज, जामुन और अर्जुन जैसे ऑक्सीजन-रिच और पर्यावरण के अनुकूल देशी पौधे लगाए जाएंगे।

आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छह जुलाई को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-5 के तहत आदेश जारी किया है। छत्तीसगढ़ से पहले गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना और मध्य प्रदेश जैसे राज्य भी कोनोकार्पस के रोपण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा चुके हैं।

सरकार के आदेश के अनुसार अब राज्य की सीमा में कोई भी व्यक्ति, सरकारी विभाग, नगर निगम, पंचायत, सार्वजनिक उपक्रम, स्वायत्त संस्था या निजी एजेंसी कोनोकार्पस का नया वृक्षारोपण नहीं कर सकेगी। यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

कोनोकार्पस मूल रूप से विदेशी तटीय प्रजाति है, जो तेजी से बढ़ती है। इसे कई राज्यों में सड़क किनारे सजावटी पेड़ के रूप में लगाया गया। सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय सशक्त समिति की 21 अगस्त 2025 की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह कदम उठाया। रिपोर्ट में कहा गया कि यह प्रजातिस्थानीय वनस्पतियों और जैव विविधता को नुकसान पहुंचा सकती है। प्राकृतिक पारिस्थितिकी को असंतुलित कर सकती है।भूजल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है तथा जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।

समिति ने नए रोपण पर रोक के साथ-साथ पहले से लगे पौधों को चरणबद्ध तरीके से देशी प्रजातियों से बदलने की भी सिफारिश की थी। सरकार इसी दिशा में आगे काम करेगी।

उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा सत्र में कोनोकार्पस और छातिम (सप्तपर्णी) के पौधों को लेकर चर्चा हुई थी और सरकार ने कहा था कि खतरनाक प्रकृति के इन पेड़ों को जल्द ही प्रतिबंधित किया जाएगा। फिलहाल सरकार ने कोनोकार्पस के रोपण पर रोक लगाई है, मगर छातिम (सप्तपर्णी) को लेकर कोई भी फैसला नहीं किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा