छत्तीसगढ़ के दुर्गम अबूझमाड़ के 9 गांवों में पहली बार लहराया तिरंगा
रायपुर, 15 अगस्त (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के घोर माओवाद प्रभावित बस्तर संभाग के अबूझमाड़ में नौ गांवों में आजादी के बाद पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया और पूरे सम्मान के साथ तिरंगा लहराया।
नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक संदीप पटेल ने बताया कि नक्सलमुक्त होने के बाद बोटेर के साथ ही कोरसकोडो, हचेकोटी, आदनार, बोटेर, कुमनार, दिवालुर, गुंडेकोट, रेकापाल और रासमेटा में तिरंगा लहराते ही ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी, गर्व और नए विश्वास की झलक दिखाई दी। कभी जहां लाल आतंक का प्रभाव था, वहां अब भारत माता की जय के उद्घोष के बीच राष्ट्रीय ध्वज आसमान में लहराता नजर आया। सुरक्षा कैंप की स्थापना के बाद ग्रामीणों को सुरक्षा का अहसास हुआ है और नक्सलियों की गांव तक पहुंच लगभग खत्म हो गई है।
31 मार्च 2026 को क्षेत्र के माओवाद मुक्त होने के बाद यह पहला अवसर है, जब इन गांवों में राष्ट्रीय पर्व खुले तौर पर मनाया गया। माओवादियों के फरमान और भय ने ग्रामीणों को देश के राष्ट्रीय उत्सवों से दूर कर दिया था।
नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर बसा बोटेर आज भी बेहद दुर्गम इलाका है। नारायणपुर से ओरछा ब्लॉक मुख्यालय तक करीब 67 किलोमीटर और वहां से लगभग 55 किलोमीटर दूर बोटेर स्थित है। दुपहिया वाहन से केवल नजदीकी पुलिस कैंप कुडमेल तक पहुंचा जा सकता है। इसके बाद करीब 09 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ता है। इस रास्ते में कई छोटे-बड़े नदी-नाले, बांस और लकड़ियों से बने अस्थायी पुल, कीचड़ से भरे फिसलन वाले पहाड़ी रास्ते और घने जंगल पड़ते हैं।इन्हीं दुर्गम रास्तों को पार कर बोटेर पहुंचना पड़ता है।
इस साल मार्च में बोटेर क्षेत्र में सुरक्षा कैंप की स्थापना के बाद यहां पहली बार स्वतंत्रता दिवस का आयोजन हुआ। पुलिस जवानों की मौजूदगी में ग्रामीणों ने पूरे उत्साह के साथ पहली बार तिरंगा फहराया। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर आजादी के जश्न में शामिल हुए। ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली बार है जब उनके गांव में तिरंगा फहराया गया है। इससे पहले नक्सलियों के फरमान के चलते गांव में लाल झंडा या काला झंडा ही दिखाई देता था।लगभग 60 की संख्या की आबादी वाले इस गांव में पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया जाना ग्रामीणों के लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण क्षण रहा।
पुलिस के अनुसार क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के नक्सलियों के लगभग समाप्ति के बाद ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा है। मार्च 2026 में सुरक्षा शिविर की स्थापना के बाद अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में प्रशासन और सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ी है। बोटेर की अतिथि शिक्षक सुनीता और ग्रामीणों ने बताया कि अब बच्चे स्कूल जा पा रहे हैं और गांव में पहले जैसा डर नहीं है।
नारायणपुर पुलिस का दावा है कि अबूझमाड़ के इन नौ गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया जाना केवल ध्वजारोहण का कार्यक्रम नहीं रहा। यह लंबे समय तक चले भय से बाहर निकलने, शांति की ओर बढ़ने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में ग्रामीणों के बढ़ते विश्वास की तस्वीर बन गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा