फसल बोनस नीति पर केंद्र की सफाई, राज्यों को भेजा गया डीओ पत्र निर्देश नहीं बल्कि सलाह
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (हि.स.)। केंद्र सरकार ने राज्यों की फसल बोनस नीति को लेकर उठे विवाद पर स्पष्ट किया है कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा 9 जनवरी को राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजा गया अर्ध-सरकारी (डीओ) पत्र कोई निर्देश नहीं बल्कि एक सलाह थी। इसका उद्देश्य राज्यों को दलहन, तिलहन और मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि देश में पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि को मजबूत किया जा सके।
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 9 जनवरी को राज्यों के मुख्य सचिवों को डीओ पत्र भेजा था। इसमें दलहन, तिलहन और मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए बोनस नीति में बदलाव का सुझाव दिया गया था।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है। साथ ही यह दीर्घकालिक खाद्य और फसल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक प्रयास है।
केंद्र ने कहा कि कई राज्यों में गेहूं और धान की खेती पर अधिक जोर है। राज्यों द्वारा एमएसपी के ऊपर बोनस देने से यही प्रवृत्ति और बढ़ती है। इससे दलहन और तिलहन की खेती कम होती है और आयात पर निर्भरता बढ़ती है।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना राष्ट्रीय हित में जरूरी है। इससे पर्यावरणीय दबाव कम होगा और किसानों की आय भी बेहतर होगी। दलहन और तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसमें आत्मनिर्भर भारत के तहत मिशन, खाद्य तेल मिशन और अन्य पहल शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि पत्र को गलत तरीके से पेश करना तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश करने जैसा है। यह राज्यों पर कोई बोझ नहीं बल्कि साझा जिम्मेदारी है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर