पराली जलाने से रोकने के लिए सही समय पर प्रेरित करने की जरूरत: सीईईडब्ल्यू रिपोर्ट

 


नई दिल्ली, 16 जून (हि.स.)। पंजाब में फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े संचार को सभी के लिए एक जैसे समाधान से आगे बढ़ना होगा। जागरूकता को पराली न जलाने का एक स्थायी व्यवहार बनाने के लिए, किसानों के व्यवहार पर आधारित संचार रणनीतियां अपनाना जरूरी है। यह जानकारी 'काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर' (सीईईडब्ल्यू) के एक नए स्वतंत्र अध्ययन से सामने आई है।

सीईईडब्ल्यू का अध्ययन, 'बिहेवियर चेंज एप्रोचेस टू टैकल स्टबल बर्निंग एट स्केल' बताता है कि भले ही वर्ष 2022 से पराली जलाने की दर्ज घटनाओं में कमी आई है, लेकिन इसे जलाने के तरीके में बदलाव और सैटेलाइट से पता लगाने की सीमाओं के कारण अब इसके आंकड़ों के विश्लेषण करने में किसानों के व्यवहार, इसे जलाने के समय और उपलब्ध विकल्पों को अपनाने की दर को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

पंजाब के चार जिलों में 102 किसानों के बीच एक प्राथमिक और गैर-प्रतिनिधिक सर्वेक्षण, फोकस समूह चर्चाओं और सरकारी अधिकारियों से बातचीत के आधार पर सीईईडब्ल्यू ने पाया है कि सूचनाओं की कमी के अलावा, अविश्वास, सामाजिक मान्यताएं और वित्तीय स्थिति जैसी व्यावहारिक बाधाएं लगातार किसानों के फैसलों को प्रभावित कर रही हैं। इनमें से कई बाधाएं प्रभावी और स्थानीय परिस्थिति अनुकूल संचार से दूर की जा सकती हैं।

सीईईडब्ल्यू की फेलो प्रार्थना बोराह ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि “पंजाब ने पराली जलाने की दर्ज घटनाओं को घटाने में काफी प्रगति की है, लेकिन इस सुधार को बरकरार रखने के लिए व्यापक जागरूकता अभियानों से लक्षित व्यवहार परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाना होगा। हमारा अध्ययन दिखाता है कि किसानों के इरादे में कोई कमी नहीं है। कई किसान पहले से पराली जलाने को गलत मानते हैं और इससे बचने के विकल्पों को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों तक सटीक समय पर और भरोसेमंद माध्यमों से ऐसे व्यावहारिक मार्गदर्शनों को पहुंचाने की चुनौती है, जो कीटों के हमले, मशीनों के उपयोग, लागत और कटाई के लिए सीमित समय जैसी उनकी वास्तविक चिंताओं का समाधान कर सकें।

सर्वे में शामिल 62 प्रतिशत किसानों ने एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर्स पर भरोसा जताया, जिसके बाद वे अपने साथी किसानों पर भरोसा करते हैं। यह दिखाता है कि भले ही डिजिटल माध्यम कवरेज बढ़ा सकते हैं, लेकिन विश्वसनीयता बनाने के लिए आमने-सामने की बातचीत सबसे जरूरी है।

प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक बनाना जरूरी है: प्रशिक्षण सत्रों में हिस्सा लेने वाले किसानों बताया कि ये सत्र मुख्य रूप से व्याख्यान (लेक्चर) पर आधारित थे और इनमें खेतों पर जाकर व्यावहारिक प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) की कमी थी।

मशीन किराए पर लेने वाले सर्वे में शामिल किसानों में से 56 प्रतिशत ने मशीनें अपने साथी किसानों से, जबकि 34 प्रतिशत ने कस्टम हायरिंग सेंटर्स से ली थी। यह दिखाता है कि आपसी सहयोग किसानों की मशीनों तक पहुंच होना पहले से ही व्यवहार परिवर्तन का प्रमुख माध्यम है। सीईईडब्ल्यू के अध्ययन ने 'आंशिक रूप से पराली जलाने वाले' किसानों को तत्काल व्यवहार परिवर्तन की जरूरत वाले समूह के रूप में चिन्हित किया है। ये ऐसे किसान हैं जो फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का उपयोग तो करते हैं, लेकिन कीटों के हमले जैसी चिंताओं के कारण थोड़ी-बहुत पराली जला देते हैं। पराली को आंशिक या पूरी तरह से जलाने वाले सर्वे में शामिल किसानों में से 67 प्रतिशत किसानों ने कीटों के हमले के डर को इसकी मुख्य वजह बताया। अध्ययन का सुझाव है कि इस डर को दूर करने के लिए लक्षित तरीके से तकनीकी समाधान और खेतों में व्यवहारिक प्रदर्शन जैसे कदम मददगार हो सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी