एलयूसीसी चिटफंड घोटालाः सीबीआई ने दो मुख्य आरोपितों को मुंबई से गिरफ्तार किया

 


नई दिल्ली, 02 जून (हि.स.)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तराखंड के चर्चित एलयूसीसी चिटफंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए इसके दो कथित मास्टरमाइंड किशन जैन और पंकज जैन उर्फ पंकज चौधरी को मुंबई से गिरफ्तार किया। दोनों पर आरोप है कि इन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर एलयूसीसी की अनियमित जमा योजनाओं के माध्यम से निवेशकों से जुटाई गई राशि के संग्रह, संचालन, हेराफेरी और गबन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

सीबीआई ने मंगलवार को बताया कि दोनों आरोपितों को सोमवार को गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी वित्तीय अभिलेखों के विस्तृत विश्लेषण, बैंक लेनदेन की जांच, मौखिक साक्ष्यों के संकलन और देश के विभिन्न राज्यों में किए गए व्यापक अन्वेषण के बाद हुई। ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने के बाद दोनों आरोपितों को देहरादून स्थित बड्स अधिनियम अदालत में पेश किया जाएगा।

एजेंसी के अनुसार मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 17 सितंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में सीबीआई द्वारा 26 नवंबर 2025 को दर्ज किया गया था। सीबीआई ने उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज 18 प्राथमिकी अपने हाथ में लेकर एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी) के पदाधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, भारतीय न्याय संहिता, उत्तराखंड जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम तथा अनियमित जमा योजनाएं प्रतिबंध अधिनियम (बड्स अधिनियम) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

सीबीआई ने बताया कि यह मामला जनता से अवैध रूप से जमा राशि एकत्र करने, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश, अनियमित जमा योजनाओं के संचालन और धन के दुरुपयोग से संबंधित है। जांच में सामने आया कि उत्तराखंड में एक लाख से अधिक निवेशकों को एलयूसीसी की विभिन्न अनियमित जमा योजनाओं में निवेश के लिए प्रलोभन दिया गया। इन निवेशकों द्वारा जमा की गई कुल राशि लगभग 800 करोड़ रुपये आंकी गई है।

सीबीआई के अनुसार, जांच में दोनों गिरफ्तार आरोपितों की बड़ी साजिश में संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं। वे लाखों निवेशकों से जुटाई गई राशि के हस्तांतरण, प्रबंधन और उपयोग से जुड़े नेटवर्क का अहम हिस्सा थे।

इससे पहले सीबीआई ने 12 एवं 13 मई को पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एलयूसीसी के तीन वरिष्ठ सहकारी प्रवर्तक भी शामिल थे। ये लोग उत्तराखंड में जनता से जमा राशि एकत्र करने और विभिन्न शाखाओं का संचालन करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। सभी पांच आरोपित वर्तमान में देहरादून की सुधोवाला जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।

सीबीआई ने जांच के दौरान आरोपितों द्वारा अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई कई अचल संपत्तियों का भी पता लगाया है। इन संपत्तियों का विवरण सक्षम प्राधिकारी, उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव को भेज दिया गया है। सीबीआई ने बड्स अधिनियम के तहत इन संपत्तियों को फ्रीज करने और पीड़ित निवेशकों को राहत दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है। सीबीआई ने कहा कि मामले की जांच जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर