एनसीआर के उद्योगों में अब कैमरों से होगी ईंधन इस्तेमाल की निगरानी
नई दिल्ली, 06 अक्टूबर (हि.स.)। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के उद्योगों में ईंधन के इस्तेमाल और नियमों के अनुपालन की निगरानी और सख्त करने के लिए पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरों की कवरेज बढ़ाने का आदेश दिया है। आयोग ने उद्योगों को अतिरिक्त पीटीजेड कैमरे 31 अक्टूबर 2026 तक लगाने के निर्देश दिए हैं।
सीएक्यूएम ने मंगलवार को एक बयान में बताया कि एनसीआर में औद्योगिक इकाइयों द्वारा प्रदूषण फैलाने वाले और अनुमोदित सूची में शामिल नहीं किए गए ईंधन के इस्तेमाल की शिकायतें और निरीक्षणों में मामले सामने आए हैं। ऐसे में ईंधन की खपत की रियल-टाइम निगरानी जरूरी हो गई है। नए निर्देशों के तहत उद्योगों को पीटीजेड कैमरे इस तरह लगाने होंगे कि सभी ईंधन भंडारण क्षेत्रों और ईंधन चार्जिंग प्वाइंट कैमरे की निगरानी में रहें। गैस आधारित ईंधन इस्तेमाल करने वाली इकाइयों में गैस के गेज या मीटर को भी कैमरे में स्पष्ट रूप से कैप्चर करना होगा।
इन कैमरों की वीडियो फीड की रियल-टाइम स्ट्रीमिंग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) या दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के सर्वर पर उपलब्ध करानी होगी।
सीएक्यूएम ने उद्योगों को कैमरों और उनकी कनेक्टिविटी के लिए पर्याप्त पावर बैकअप सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। वहीं, सीपीसीबी और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को रियल-टाइम वीडियो फीड प्राप्त करने और निगरानी के लिए पोर्टल तथा जरूरी तकनीकी ढांचा विकसित करने को कहा गया है।
संबंधित बोर्ड को इन उपायों के क्रियान्वयन की स्थिति की रिपोर्ट 1 नवंबर 2026 तक आयोग को सौंपनी होगी।
औद्योगिक उत्सर्जन पर निगरानी के लिए सीपीसीबी पहले ही उद्योगों को कैमरों के साथ रियल-टाइम ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दे चुका है। कुछ उद्योगों में कैमरों से पोर्ट-होल और चिमनी से निकलने वाले धुएं की निगरानी की व्यवस्था की गई थी। धातु उद्योगों में फ्यूम एक्सट्रैक्शन सिस्टम और फर्नेस फीडिंग क्षेत्र भी निगरानी के दायरे में थे।
आयोग के नए आदेश से अब निगरानी का दायरा बढ़ाकर ईंधन के भंडारण और इस्तेमाल के प्रमुख बिंदुओं तक कर दिया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी