पंजाब में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं पर सीएक्यूएम सख्त, 12 जिलों के अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश

 




नई दिल्ली, 04 नवंबर (हि.स.)।

पंजाब में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने गंभीर रुख अपनाया है। आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने बुधवार को पंजाब के पर्यावरण एवं कृषि विभाग के सचिवों, 12 जिलों के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। बैठक में राज्य में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए अब तक किए गए उपायों की समीक्षा की गई और निगरानी एवं कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में फिरोजपुर, फरीदकोट, फाजिल्का, जालंधर, बठिंडा, पटियाला, बरनाला, लुधियाना, मालेरकोटला, मोगा, संगरूर और मानसा जिलों के अधिकारी शामिल हुए।

आयोग ने निर्देश दिया कि पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए निगरानी और कार्रवाई अभियान तेज किया जाए। नोडल अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। निगरानी में कमी या खेतों में आग की घटनाओं को रोकने में विफल रहने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आयोग ने खेतों में पुलिसकर्मियों और नोडल अधिकारियों की मौजूदगी तथा उनकी कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की। साथ ही, पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में उनकी प्रभावशीलता पर जोर दिया। आयोग ने निर्देश दिया कि स्थानीय समुदाय के नेताओं को भी विश्वास बढ़ाने के उपायों के जरिए इस अभियान से जोड़ा जाए। जिला और राज्य प्रशासन को पराली के अधिक से अधिक संग्रहण और उसके अन्य उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कहा गया है। आयोग ने कहा कि राज्य को थर्मल पावर प्लांटों में कम से कम 5 प्रतिशत बायोमास पेलेट के इस्तेमाल का लक्ष्य पूरा करना चाहिए। इससे धान की पराली का उपयोग बढ़ेगा और खेतों में उसे जलाने की घटनाओं में कमी आएगी।

आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्देशों का पालन नहीं करने वाले बिजली संयंत्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में आयोग ने कहा कि पंजाब में पिछले दिन पराली जलाने की घटनाओं में हुई अचानक वृद्धि एक बार की घटना होनी चाहिए और इसे दोबारा नहीं होने देना चाहिए।

इस दौरान हरियाणा का उदाहरण भी दिया गया, जहां बेहतर योजना और पराली प्रबंधन के कारण जिलों में आग लगने की घटनाएं काफी कम हैं। आयोग ने पंजाब प्रशासन से हरियाणा के अनुभवों से सीख लेने की सलाह दी।

आयोग ने स्पष्ट किया कि खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी