गुरुग्राम में ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों का मंथन, नवाचार और सहयोग पर जोर

 


ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों ने राष्ट्रीय परिस्थितियों, विकास प्राथमिकताओं और ऊर्जा प्रवाह को सम्मान देने के महत्व दोहराया

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र का शुभारंभ

गुरुग्राम, 25 जून (हि.स.)। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत स्थिति से दृढ़ता से उबरने, नवाचार और सहयोग के लिए निर्माण विषय पर आधारित 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक गुरुवार को गुरुग्राम में हुई।

बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्रियों, उप मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श और ऊर्जा क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग पर चर्चा की गई। इसमें अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (जीबीए) और न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) सहित प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। सर्वेषां ऊर्जम् (सभी के लिए ऊर्जा) विषय पर आधारित चर्चा तीन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित रही।

इसमें ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता, जिसमें स्थिति अनुरूप ऊर्जा प्रणालियों, विविध ऊर्जा स्रोतों, महत्वपूर्ण खनिज पदार्थों, आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ता, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण और सुरक्षित, किफायती ऊर्जा आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित किया गया। ऊर्जा पहुंच और समानता, जिसमें सस्ती, भरोसेमंद, संवहनीय और आधुनिक ऊर्जा तक सार्वभौमिक पहुंच, खाना पकाने के स्वच्छ समाधान, किफायती वित्तपोषण, क्षमतावर्द्धन और उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया गया।

प्रौद्योगिकी और नवाचार, स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा भंडारण, हाइड्रोजन मूल्य शृंखला (उत्पादन, भंडारण और वितरण, तथा अंतिम उपयोग अनुप्रयोग), ऊर्जा प्रणालियों का डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा दक्षता, जैव ईंधन, कार्बन कैप्चर प्रौद्योगिकियों तथा ब्रिक्स देशों में अनुसंधान और नवाचार सहयोग मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

केंद्रीय विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और मानव विकास के लिए ऊर्जा,मूलभूत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को अपने लोगों की उचित आकांक्षाएं पूरी करते हुए सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय, संसाधन और नीतिगत उपाय करने की जरूरत है। उन्होंने सर्वेषां ऊर्जाम् के सिद्धांत से निर्देशित स्थिति दृढ़, भविष्योन्मुखी और जन-केंद्रित ऊर्जा प्रणाली निर्मित करने की भारत की प्रतिबद्धता रेखांकित की।

केंद्रीय विद्युत मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आए उल्लेखनीय बदलाव की चर्चा करते हुए बताया कि भारत विश्व में बिजली का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता बनकर उभरा है, जिसकी विद्युत स्थापन क्षमता लगभग 540 गीगावाट तक पहुंच गई है जिसमें गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों का योगदान कुल स्थापन क्षमता के आधे से अधिक है।

उन्होंने भारत में स्वच्छ ऊर्जा के तीव्र विस्तार का उल्लेख किया, जिसमें सौर ऊर्जा क्षमता 2014 में लगभग तीन गीगावाट से बढ़कर आज 154 गीगावाट से अधिक हो गई है। उन्होंने छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने में तेजी लाने और ऊर्जा स्रोत परिवर्तन में नागरिकों की भागीदारी बढाने में प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना जैसी प्रमुख पहल की चर्चा की।

मनोहर लाल ने 2032 तक 400 गीगावाट घंटे से अधिक ऊर्जा भंडारण क्षमता और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने की भारत की महत्वाकांक्षाओं का उल्लेख किया, साथ ही उन्होंने निर्धारित समय से पहले 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण हासिल करने और

ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों ने हाइड्रोजन वैल्यू चेन 2026 पर ब्रिक्स संयुक्त रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के प्रयासों की भी सराहना की, जो हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों, मानकों, औद्योगिक अनुप्रयोगों और भविष्य की मूल्य शृंखला पर बेहतर सहयोग का आधार प्रदान करेगा

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर