गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय दिल्ली स्थानांतरित करने का बिहार ने किया विरोध, पटना में बनाए रखने का निर्देश

 


पटना/नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (हि.स.)। नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 19वीं बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय पटना से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आयोग का मुख्यालय पूर्व की भांति पटना में ही बनाए रखने की मांग की। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने भी इस मांग का समर्थन किया। इसके बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने आयोग का मुख्यालय पूर्ववत रखने का निर्देश दिया।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विजय कुमार चौधरी ने कहा कि वर्ष 1972 में गठन के समय से ही आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का मुख्यालय पटना में रहा है, लेकिन हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इसे दिल्ली स्थानांतरित कर दिया। इससे बिहार में बाढ़ प्रबंधन योजनाओं की स्वीकृति और बाढ़ निरोधक कार्यों के समय पर क्रियान्वयन में गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न होंगी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार पहले भी आयोग का मुख्यालय पटना में बनाए रखने का अनुरोध कर चुकी है। आयोग की मूल परिकल्पना के अनुरूप इसका मुख्यालय पटना में ही रहना चाहिए। बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और उत्तर प्रदेश के जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी बिहार की मांग का समर्थन किया।

बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बाढ़ प्रबंधन योजनाओं की समयबद्ध स्वीकृति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम और रिवर मैनेजमेंट एंड बॉर्डर एरिया प्रोग्राम के तहत प्रस्तावित योजनाओं को केंद्र सरकार से समय पर मंजूरी मिलनी आवश्यक है। बिहार सरकार का प्रयास होगा कि दिसंबर के अंत तक सभी प्रस्ताव केंद्र को भेज दिए जाएं। इसके बाद केंद्रीय जल आयोग और जल शक्ति मंत्रालय फरवरी के अंत तक योजनाओं को स्वीकृति दें, जिससे कि बाढ़ निरोधक कार्यों के क्रियान्वयन के लिए कम से कम तीन महीने का समय मिल सके। केंद्रीय मंत्री ने इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।

बैठक में गाद प्रबंधन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नदियों में अनियंत्रित गाद जमा होने से उनकी जलधारण क्षमता लगातार घट रही है और बाढ़ की भयावहता बढ़ रही है। गाद के जमाव से नदी तल ऊंचा उठ रहा है, जिसके कारण हाल के वर्षों में नदियों का जलस्तर नए उच्चतम बिंदु (एचएफएल) तक पहुंच रहा है। उन्होंने आगाह किया कि समय रहते गाद प्रबंधन के प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो नदियों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार ने गाद प्रबंधन को उसके व्यावसायिक उपयोग से जोड़ते हुए देश में पहली बार 'बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026' तैयार की है। उन्होंने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर भी गाद प्रबंधन नीति बनाने की मांग की।

बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, बिहार के जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह सहित विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, नीति आयोग, केंद्रीय जल आयोग और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।----------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी