बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने दिया इस्तीफा, रामवचन राय ने संभाला कार्यकारी सभापति का पद
पटना, 28 सितंबर (हि.स.)। बिहार विधान परिषद के सभापति और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार देर शाम अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद उपसभापति और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधान पार्षद रामवचन राय ने कार्यकारी सभापति के रूप में जिम्मेदारी संभाल ली।
पद छोड़ने के बाद अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि उन्हें पार्टी का फैसला स्वीकार है और उन्हें किसी तरह का गिला-शिकवा नहीं है। पार्टी ने उन्हें चार बार विधान परिषद का सभापति बनने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि आगे पार्टी की ओर से जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसका वे निर्वहन करेंगे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान विधान परिषद के सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार भी जताया।
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के तुरंत बाद रामवचन राय ने कार्यकारी सभापति का पद संभाला। उन्होंने अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि वे मिली जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। रामवचन राय लंबे समय से बिहार विधान परिषद से जुड़े हैं और वर्तमान में जदयू के विधान पार्षद हैं। उनका मौजूदा विधान परिषद कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक है।
रामवचन राय 83 वर्ष के हैं और उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में माना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ की थी। वर्ष 2004 में लालू प्रसाद यादव ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया था। इसके बाद वर्ष 2011 में वे जदयू के विधान पार्षद बने और बाद में विधान परिषद के उपसभापति की जिम्मेदारी भी संभाली।
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे को भाजपा और जदयू के बीच सत्ता-साझेदारी की व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में प्रमुख विधायी पदों के बंटवारे को लेकर यह समझ बनी है कि यदि विधानसभा अध्यक्ष का पद भाजपा के पास रहता है तो विधान परिषद के सभापति का पद जदयू को दिया जाएगा। इसी व्यवस्था के तहत परिषद के सभापति पद पर जदयू की दावेदारी सामने आई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी