पुस्तक विवाद में जम्मू विवि ने ब्लैकलिस्ट किए गए लेखकों और पब्लिशर्स पर रोक लगाई
जम्मू, 15 जुलाई (हि.स.)। जम्मू विश्वविद्यालय ने पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ़ जम्मू कश्मीर (जम्मू कश्मीर की हस्तियां और दिग्गज) नाम की किताब को लेकर हुए विवाद के बाद इसके लेखकों और पब्लिशर्स को ब्लैकलिस्ट करके बैन लगा दिया है। साथ ही यूनिवर्सिटी ने अपने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे अपनी लाइब्रेरी से ऐसी कोई भी सामग्री हटा लें। इस पुस्तक में अलगाववादियों और देश-विरोधी तत्वों का महिमामंडन करने का आरोप है।
जम्मू यूनिवर्सिटी के अनुसार यह फ़ैसला स्कूल शिक्षा विभाग के 4 जुलाई को जारी सरकारी आदेश संख्या 257- जेके के अनुपालन में लिया गया है। इस आदेश में लेखकों और पब्लिशर्स पर बैन लगाया गया था और केंद्र शासित प्रदेश से उनकी लिखी या प्रकाशित सभी प्रकाशित सामग्री को हटाने का निर्देश दिया गया था। बैन किए गए लेखक हिलाल अहमद, संतोष मीना और डॉ. सुशांत गिरी हैं, जबकि ब्लैकलिस्ट किए गए पब्लिशर्स ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू और अनुराग प्रकाशन, दिल्ली हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे भविष्य में इन लेखकों या पब्लिशर्स से कोई भी किताब या अन्य प्रिंटेड सामग्री न खरीदी जाए।
शिक्षा विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि वे सरकारी आदेश का सख्ती से पालन करते हुए अपने कार्यालयों, विभागों, लाइब्रेरी या डिजिटल रिपॉजिटरी में मौजूद ऐसी किसी भी पब्लिकेशन की पहचान करें और उसे हटा दें। यूनिवर्सिटी ने सभी एकेडमिक यूनिट्स को यह भी निर्देश दिया है कि वे संबंधित डिपार्टमेंटल एडवाइजरी कमेटियों (डीएसी ) के माध्यम से एक मज़बूत स्क्रीनिंग मैकेनिज्म बनाएं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश-विरोधी, अलगाववादी या आपत्तिजनक सामग्री वाली किताबें, जर्नल, मैगज़ीन या कोई अन्य पब्लिकेशन न तो खरीदे जाएं और न ही किसी एकेडमिक या एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट में उपलब्ध कराए जाएं।
विभागों से कहा गया है कि वे वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद यूनिवर्सिटी अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट सौंपें। किताबें और शिक्षा सामग्री खरीदने के लिए एक पूरी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाने के लिए एक कमेटी भी बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित एसओपी में एक सख्त स्क्रीनिंग सिस्टम शामिल होगा और यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी और डिजिटल रिपॉजिटरी में आपत्तिजनक कंटेंट को आने से रोकने के लिए एकेडेमिक्स के एक पैनल द्वारा पब्लिकेशन की समय-समय पर रैंडम जांच की व्यवस्था होगी। यूनिवर्सिटी का यह कदम जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा विवादित किताब पर्सनैलिटीज़ एंड लेजेंड्स ऑफ़ जम्मू कश्मीर की चल रही जांच के बीच उठाया गया है।
जम्मू स्थित काउंटर इंटेलिजेंस (सीआईडी) विंग ने किताब के पब्लिकेशन के सिलसिले में जम्मू और दिल्ली से तीन लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में जम्मू के पब्लिशर इंद्रपाल, दिल्ली के प्रिंटर अमरदीप सिंह और गिरीश अरोड़ा हैं, जिन्होंने पब्लिकेशन के लिए कंटेंट उपलब्ध कराया था। काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने प्राथमिकी दर्ज की है और उन आरोपों की जांच कर रही है कि किताब में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों और अलगाववादी तत्वों का महिमामंडन किया गया था। इससे पहले जांच के हिस्से के तौर पर जम्मू और नोएडा में तलाशी भी ली गई थी।
इस बीच जम्मू के स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के साथ-साथ कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे क्लासरूम, स्टाफ रूम, ऑफिस और लाइब्रेरी में मौजूद किताबों की पूरी समीक्षा करें, ताकि यह पक्का किया जा सके कि किसी भी पब्लिकेशन में आपत्तिजनक या अनुचित कंटेंट न हो। इस विवाद के कारण जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को हटा दिया और दो ऐसी किताबों की जांच के आदेश दिए, जिनमें प्रशासन के अनुसार बेहद अनुचित कंटेंट पाया गया था। इस मुद्दे पर बीजेपी, कांग्रेस, जम्मू कश्मीर पीपल्स फोरम और कई अन्य राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी कड़ी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि पब्लिकेशन में अलगाववाद का महिमामंडन किया गया था।
---------------------------
हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता