ओडिशा से ‘ब्लू रिवोल्यूशन’ का राष्ट्रीय आगाज़, उपराष्ट्रपति ने लॉन्च किया हाई सीज़ फिशिंग के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन सिस्टम
भुवनेश्वर, 09 जुलाई (हि.स.)। भारत की समुद्री मत्स्य संपदा और ब्लू इकोनॉमी के इतिहास में गुरुवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। राजधानी भुवनेश्वर स्थित ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 'सस्टेनेबल हार्नेसिंग ऑफ फिशरीज इन द हाई सीज़' के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन प्रणाली का राष्ट्रीय शुभारंभ किया। इसी अवसर पर 'ओडिशा डीप-सी फिशिंग मिशन डॉक्यूमेंट (2026-2036)' का भी औपचारिक लोकार्पण किया गया।
यह कार्यक्रम भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, विभिन्न मत्स्य सहकारी समितियों तथा गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के मालिकों को लेटर ऑफ ऑथराइजेशन वितरित किए गए। इसके माध्यम से योग्य भारतीय जहाजों को देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र से बाहर अंतरराष्ट्रीय समुद्री जलक्षेत्र में नियंत्रित एवं जिम्मेदार तरीके से उच्च मूल्य वाली मछलियां, विशेषकर टूना, पकड़ने की अनुमति मिलेगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात कर विश्व में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि अभी तक अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां तट से 40-50 नॉटिकल मील तक सीमित हैं, जबकि नई व्यवस्था के तहत भारतीय मछुआरे अंतरराष्ट्रीय समुद्री जलक्षेत्र में जाकर उच्च मूल्य वाली मछलियों का दोहन कर सकेंगे। इससे देश की खाद्य सुरक्षा, पोषण और निर्यात क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 'भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा सतत गहरे समुद्र में मत्स्य दोहन हेतु दिशा-निर्देश-2025' के तहत लेटर ऑफ ऑथराइजेशन प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह केवल संबंधित जहाज के लिए ही मान्य रहेगा और हस्तांतरणीय नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि यह प्रणाली 'रीयलक्राफ्ट फिशिंग वेसल रजिस्ट्रेशन पोर्टल' से जुड़ी होगी, जिससे जहाजों की ऑनलाइन निगरानी, रियल टाइम ट्रैकिंग और डेटा आधारित संचालन सुनिश्चित होगा। इससे गहरे समुद्र में मत्स्य दोहन पूरी तरह पारदर्शी और उत्तरदायी बनेगा तथा भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
अपने संबोधन की शुरुआत उपराष्ट्रपति ने भगवान जगन्नाथ को नमन करते हुए ओड़िया भाषा में की। उन्होंने कहा कि ओडिशा की ऐतिहासिक बाली यात्रा और बोइत बंदाण जैसी परंपराएं राज्य की गौरवशाली समुद्री व्यापार संस्कृति का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक डीप-सी फिशिंग मिशन इस ऐतिहासिक विरासत को नई तकनीक के साथ पुनर्जीवित करेगा।
राज्यपाल डॉ. हरिबाबू कंभमपटि ने कहा कि भारत की लंबी समुद्री तटरेखा और विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र देश के लगभग 5 करोड़ (50 मिलियन) मछुआरों की आजीविका का आधार है। लेटर ऑफ ऑथराइजेशन प्रणाली से मत्स्यजीवी परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विशेष रूप से ओडिशा जैसे तटीय राज्यों को बड़ा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि ओडिशा की धरती से लेटर ऑफ ऑथराइजेशन प्रणाली का राष्ट्रीय शुभारंभ पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य के लगभग 6 लाख समुद्री मछुआरों के जीवन में यह पहल नया बदलाव लाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिसंबर 2025 में गुजरात के वेरावल से भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र क्षेत्र के लिए 'एक्सेस पास' व्यवस्था शुरू की गई थी, जिसके तहत अब तक देशभर के 5,000 मछुआरों को अनुमति मिल चुकी है। इनमें 866 मछुआरे ओडिशा के हैं। अब अगले चरण में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन जारी किए जा रहे हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि प्रारंभिक चरण में ओडिशा के 8 मछुआरों को लेटर ऑफ ऑथराइजेशन प्रदान किए गए हैं। साथ ही मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना के तहत दो डीप-सी फिशिंग वेसल (DSFV) को भी भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र क्षेत्र में संचालन की अनुमति दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा विजन-2036 और विकसित भारत-2047 के अनुरूप राज्य सरकार ने ओडिशा डीप-सी फिशिंग मिशन शुरू किया है। इसके तहत अगले 10 वर्षों में 150 अत्याधुनिक डीप-सी फिशिंग वेसल शामिल किए जाएंगे तथा 500 मौजूदा मछली पकड़ने वाले जहाजों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पारादीप, धामरा, गोपालपुर, चांदीपुर और अस्तरंग में आधुनिक फिश लैंडिंग सेंटर, थोक बाजार और एक्वा पार्क विकसित किए जाएंगे। साथ ही पूरे मत्स्य क्षेत्र का डिजिटलीकरण कर 'रीयलक्राफ्ट' पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन पहलों से ओडिशा पूर्वी भारत का प्रमुख मरीन हब बनेगा और राज्य की ब्लू इकोनॉमी को नई गति मिलेगी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ओडिशा में मत्स्य उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं और आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलने से राज्य जल्द ही मत्स्य उत्पादन और समुद्री खाद्य निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल हो सकता है।
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार समुद्री मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास के लिए लगातार नीतिगत सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि गहरे समुद्र में उपलब्ध विशाल मत्स्य संसाधनों के वैज्ञानिक और जिम्मेदार उपयोग के लिए यह LoA प्रणाली एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मत्स्य एवं पशुपालन राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, ओडिशा के मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मल्लिक, मुख्य सचिव अनु गर्ग, भारत सरकार के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलाख लिखी सहित विभिन्न तटीय राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, मत्स्य सहकारी समितियों, एफएफपीओ (FFPO), समुद्री उद्यमियों तथा बड़ी संख्या में मछुआरों ने भाग लिया।
नई लेटर ऑफ ऑथराइजेशन व्यवस्था के साथ भारत ने गहरे समुद्र में वैज्ञानिक, पारदर्शी और सतत मत्स्य दोहन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। इससे न केवल समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लाखों मछुआरों की आय बढ़ाने और देश की ब्लू इकोनॉमी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो