भाजपा शासित राज्यों के जल शक्ति मंत्रियों की दो दिवसीय 'जल मंथन' कार्यशाला का समापन, सुशासन और जल प्रबंधन पर दिया जोर
नई दिल्ली, 03 सितंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित भाजपा शासित राज्यों के जल शक्ति मंत्रियों की दो दिवसीय 'जल मंथन' कार्यशाला का गुरुवार को समापन हुआ। कार्यशाला में भाजपा शासित 14 राज्यों के 25 जल शक्ति मंत्रियों ने भाग लिया।
समापन अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि जल केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि देश के विकास, किसानों की समृद्धि और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का आधार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण, जल सुरक्षा और हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और अब इन प्रयासों को राज्यों में और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकारों की पहचान सुशासन, पारदर्शिता और परिणामोन्मुखी कार्यशैली है। जल शक्ति से जुड़े विभागों के मंत्रियों की जिम्मेदारी केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी है। इसके लिए प्रशासनिक दक्षता, तकनीक का उपयोग और संगठन तथा सरकार के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
नितिन नवीन ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श नहीं, बल्कि राज्यों के सफल अनुभवों का आदान-प्रदान कर बेहतर मॉडल तैयार करना है, ताकि जल प्रबंधन, सिंचाई, पेयजल और स्वच्छता से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जा सके और जनता को बेहतर परिणाम मिलें।
दो दिवसीय कार्यशाला में गुरुवार को तीन सत्र रहे। इसमें 'इफेक्टिव मिनिस्टीरियल एस्टैब्लिशमेंट', 'व्हाट इज़ द इंडिया वॉटर स्टोरी' तथा संगठन और सरकार के बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने मंत्रियों को प्रभावी प्रशासन, जल संसाधन प्रबंधन और नीति क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। इसके साथ 14 राज्यों के मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिले।
कार्यशाला के समापन के साथ भाजपा ने जल संरक्षण और सुशासन के क्षेत्र में राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा जल शक्ति से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संकल्प को दोहराया। इस मौके पर पार्टी महासचिव संगठन बी एल संतोष, केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी