(लीड) डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार अमर हैं, कोई सत्ता उन्हें समाप्त नहीं कर सकती : नितिन गडकरी
नई दिल्ली, 06 जुलाई (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर राजधानी में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। सुबह शहीदी पार्क स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि और वृक्षारोपण कार्यक्रम हुआ, जबकि शाम को सिविक सेंटर स्थित केदारनाथ साहनी सभागार में युवा सम्मेलन एवं व्याख्यानमाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने डॉ. मुखर्जी के जीवन, राष्ट्रवाद, जम्मू-कश्मीर और भारतीय राजनीति में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत का इतिहास असंख्य देशभक्तों और बलिदानियों की गाथाओं से भरा है और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उनमें अग्रणी स्थान रखते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी के पिता सर आशुतोष मुखर्जी एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद थे और शिक्षा को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने की उनकी सोच का प्रभाव डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व पर भी पड़ा। उन्होंने शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया। स्वतंत्रता के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में उद्योग मंत्री बनाया, जहां उन्होंने देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में नीतिगत आधार तैयार किया।
गडकरी ने कहा कि विभाजन के बाद कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति और जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष प्रावधानों का डॉ. मुखर्जी ने खुलकर विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान कैसे हो सकते हैं। उस समय कश्मीर जाने के लिए परमिट की आवश्यकता होती थी, जिसे उन्होंने देश की एकता और अखंडता के विरुद्ध बताया। इसी मुद्दे पर उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया और राष्ट्रवाद को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी कश्मीर में परमिट व्यवस्था के विरोध में निकले, लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर जेल में रखा गया और वहीं उनकी मृत्यु हो गई। गडकरी ने कहा कि उनकी मृत्यु राष्ट्रवादी विचारधारा के लिए बड़ा आघात थी, लेकिन विचारों को समाप्त नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा, “कोई भी सत्ता किसी व्यक्ति को नष्ट कर सकती है, किसी व्यवस्था को नष्ट कर सकती है, लेकिन किसी के विचारों को नहीं। डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी जीवित हैं और देश को दिशा दे रहे हैं।”
गडकरी ने हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि हिंदुत्व कोई संकीर्ण धार्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय और स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सभी मतों और पंथों का सम्मान करना सिखाती है। उन्होंने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण के प्रति जितनी श्रद्धा है, उतनी ही भगवान महावीर और गौतम बुद्ध के प्रति भी है, क्योंकि भारतीय परंपरा व्यक्ति को उसके गुणों के आधार पर सम्मान देती है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 125 वर्ष बाद भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद देश कैसा होना चाहिए, इस दृष्टि को स्पष्ट रूप से सामने रखने वाले नेताओं में डॉ. मुखर्जी प्रमुख थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अलग झंडे और अलग व्यवस्था का विरोध किया तथा ‘एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ का उद्घोष किया।
रेखा गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देकर देश की एकता को कमजोर किया, जबकि डॉ. मुखर्जी ने इसके खिलाफ संघर्ष करते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाकर डॉ. मुखर्जी के सपने को साकार किया गया। आज देश एक ध्वज और एक संविधान के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है और यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी आधुनिक भारत के उन विरले नेताओं में थे जिन्होंने विद्या, वैचारिक स्पष्टता और राष्ट्रभक्ति को एक साथ जिया। उन्होंने बताया कि मात्र 33 वर्ष की आयु में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने थे और कई भाषाओं के विद्वान थे। स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में मंत्री रहने के बावजूद उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
मल्होत्रा ने कहा कि 1950 में नेहरू-लियाकत समझौते का विरोध करते हुए उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया। उन्होंने दावा किया कि इस्तीफे के समय डॉ. मुखर्जी ने कहा था कि वे मंत्री पद छोड़ सकते हैं, लेकिन राष्ट्रधर्म नहीं। इसके बाद उन्होंने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसने आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी का रूप लिया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का पूरा जीवन राष्ट्र प्रथम की भावना का उदाहरण है।
इस अवसर पर भाजपा नेताओं ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता संबंधी विचारों को देश के युवाओं तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम में सांसद मनोज तिवारी, रामवीर सिंह बिधूड़ी, योगेंद्र चांदोलिया, बांसुरी स्वराज, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, संगठन महामंत्री पवन राणा, मंत्री प्रवेश साहिब सिंह सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर