शांति और सुकून के लिए बक्सा आएं पर्यटक: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव

 


कोलकाता, 02 अक्टूबर (हि.स.)।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को देश और दुनियाभर के पर्यटकों से बक्सा टाइगर रिजर्व का दौरा करने की अपील की। पर्यटकों को अपना विशेष संदेश देते हुए उन्होंने कहा, शांति, आत्मिक सुकून और स्थायी शांति के लिए बक्सा आएं और यहां ठहरें।

बक्सा राजाभातखावा के अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने स्थानीय पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत की और एक स्वयं सहायता समूह के सदस्यों से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय स्तर पर बनी एक टोपी खरीदी और उसे पहनकर पूरे इलाके का भ्रमण किया।

'इको-टूरिज्म सिटी' के विकास पर जोर

मंत्री ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के समक्ष बक्सा क्षेत्र में एक 'इको-टूरिज्म सिटी' विकसित करने की इच्छा जाहिर की है। इसका उद्देश्य एक ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करना है जहां बाहर से आने वाले पर्यटक ठहर सकें और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर सकें।

बक्सा की समृद्ध जैव विविधता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, बक्सा केवल बाघों के लिए नहीं जाना जाता। यहां तितलियों, हाथियों, तेंदुओं और कई अन्य जीवों की विभिन्न प्रजातियां मौजूद हैं। लेकिन बक्सा की सबसे बड़ी खासियत यहां की शांति है। इस वन क्षेत्र में अद्भुत सुकून है।

'टाइगर रिटर्न्स' से वन विभाग में उत्साह

रिजर्व में बाघों की वापसी पर खुशी व्यक्त करते हुए यादव ने कहा, मैं यहां घूम रहा हूं और 'टाइगर रिटर्न्स' (बाघ की वापसी) के साइनबोर्ड देख रहा हूं। छाता लिए हुए एक बाघ की तस्वीर भी है। यह दिखाता है कि पूरे बक्सा में खुशी का माहौल है। हमारे पुराने वन अधिकारियों के लिए बाघ संरक्षण की दृष्टि से यह एक बेहद भावुक दिन है और बक्सा के लिए यह गर्व की बात है। उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास का भरोसा दिलाते हुए कहा, जब बाघ आएंगे, तो यहां अच्छी सड़कें भी बनेंगी।

बक्सा को प्लास्टिक मुक्त बनाने की शपथ और सख्त नियम

गांधी जयंती और 'स्वच्छ भारत अभियान' की भावना के अनुरूप, केंद्रीय मंत्री ने बक्सा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को क्षेत्र को पूरी तरह से 'प्लास्टिक मुक्त' रखने की शपथ दिलाई। उन्होंने टाइगर रिजर्व के अंदर प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और सख्त प्रोटोकॉल लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मंत्री ने बक्सा के निदेशक को यह सुनिश्चित करने का स्पष्ट निर्देश दिया कि पर्यटकों के लिए एक सख्त प्रवेश प्रोटोकॉल लागू किया जाए। इसके तहत पर्यटकों को प्लास्टिक की पानी की बोतलों सहित किसी भी प्रकार का प्लास्टिक अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने अपील की कि पर्यटकों को पानी के लिए प्लास्टिक की बोतलों के बजाय कांच की बोतलों और सामान के लिए जूट के बैग का इस्तेमाल करना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर