भूपेन हजारिका बंगाल और देश के भी गौरव, उनकी विरासत को संजोने में हरसंभव सहयोग करेगा राज्य : शारद्वत मुखर्जी

 


कोलकाता, 6 सितंबर (हि.स.)। भारत रत्न भूपेन हजारिका की जन्मशती के अवसर पर रविवार को कोलकाता के असम भवन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में बंगाल और असम की साझा सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने भूपेन हजारिका को केवल असम का नहीं, बल्कि बंगाल और पूरे देश का गौरव बताते हुए उनकी स्मृतियों और विरासत को संरक्षित करने में राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

शारद्वत मुखर्जी ने कहा कि भूपेन हजारिका ने अपने संगीत के माध्यम से भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं को पार कर लोगों को जोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि हजारिका की कला में असम और बंगाल की साझा संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देती है। उनकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भूपेन हजारिका केवल असम की सांस्कृतिक पहचान नहीं हैं, बल्कि बंगाल और पूरे भारत के गौरव हैं। उनके कोलकाता से गहरे संबंध रहे हैं और उनकी स्मृतियों से जुड़े स्थानों को संरक्षित करने के प्रयास में राज्य सरकार हरसंभव सहयोग करेगी।

कोलकाता असमीज कल्चरल एसोसिएशन के वर्किंग प्रेसिडेंट हितेन हाथ खावा ने बताया कि भूपेन हजारिका की जन्मशती को केंद्र में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भूपेन हजारिका का वे संगीत रहे, जिसमें भारत, असम और पश्चिम बंगाल की सभ्यता एवं संस्कृति की गहरी छाप देखने को मिलती है। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल और असम दोनों राज्यों के कई दिग्गज लोगों ने शिरकत की।

कार्यक्रम के दौरान भूपेन हजारिका के कोलकाता स्थित पुराने आवास को स्मृति स्थल के रूप में संरक्षित करने का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। असम सरकार का एक दल रविवार को दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज स्थित 77 बी, गोल्फ क्लब रोड के उस भवन का निरीक्षण करने पहुंचा, जहां हजारिका अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्षों में रहे थे। असम सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. कल्याण चक्रवर्ती ने भवन का निरीक्षण करने के बाद कहा कि इस स्थान के महत्व को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार और सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ मिलकर इसके संरक्षण की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

बताया गया कि भूपेन हजारिका इस तीन मंजिला भवन की पहली मंजिल पर पहले किरायेदार के रूप में रहते थे और वर्ष 1981 में उन्होंने इसे खरीद लिया था। बाद में 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में उन्होंने संपत्ति बेच दी और मुंबई चले गए। वर्तमान में भवन के कई मालिक और निवासी हैं, जिसके कारण इसे सीधे स्मारक के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद प्रथम तल पर स्थित हजारिका के बैठक कक्ष को संरक्षित करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

असम एसोसिएशन से जुड़े त्रिदिब शर्मा ने बताया कि यह स्थान केवल हजारिका का आवास नहीं था, बल्कि उस दौर की सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा। लता मंगेशकर और मन्ना डे जैसी हस्तियों का यहां आना-जाना था। हजारिका ने असमिया, बंगाली और हिंदी सहित कई भाषाओं में गीतों के जरिए विभिन्न संस्कृतियों के बीच सेतु का काम किया।

असम भवन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में असम सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग के निदेशक राहुल चंद्र दास, एसीएस और कोलकाता असमीज कल्चरल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. खनिंद्र पाठक समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। जन्मशती समारोह के तहत 5 सितंबर को भूपेन हजारिका पर आधारित वृत्तचित्र ‘भूपेन दा अनकट’ का प्रदर्शन किया गया। वहीं, 8 सितंबर को टॉलीगंज स्थित हजारिका के पुराने आवास पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम प्रस्तावित है।

वक्ताओं ने कहा कि भूपेन हजारिका का संगीत जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ता रहा है। उनकी लोकधुनों से प्रभावित संगीत परंपरा आज भी असम, बंगाल और देश के व्यापक सांस्कृतिक परिदृश्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। जन्मशती के अवसर पर उनके कोलकाता से जुड़े स्थान को संरक्षित करने की पहल को उनकी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान के महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर