भाऊराव देवरस का नाम आज भी प्रेरणा दे रहा : गोविन्ददेव गिरि
-साहित्य के बल पर ही भारतीय संस्कृति बची
लखनऊ, 03 फरवरी (हि.स.)। भाऊराव देवरस सेवा न्यास लखनऊ द्वारा आज 31वां पंडित प्रताप नारायण मिश्र स्मृति युवा साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर निरालानगर लखनऊ स्थित माधव सभागार में किया गया। साहित्यकार सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने कहा कि संघ के वरिष्ठ प्रचारक रहे स्वर्गीय भाऊराव देवरस का नाम आज भी प्रेरणा दे रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों ने क्या नहीं किया। क्या होती है भक्ति, क्या होता है समर्पण, क्या होती है राष्ट्रनिष्ठा और क्या होती है ध्येयनिष्ठा... यह पूरी दुनिया को दिखाई देती है ऐसी संघ के प्रचारकों की मंगलमयी धारा का मैं अभिवादन करता हूं।
गोविंददेव गिरि ने कहा कि हमारे धर्मग्रन्थों में साहित्य की अपरंपार महिमा गायी गयी है। उन्होंने कहा कि साहित्य के बल पर ही हमारी संस्कृति बची है। मुगल आक्रान्ताओं ने हमारे साहित्य को जलाया नष्ट किया फिर भी वैदिक व भारतीय संस्कृति बची। इसके कारण ही भारतीय संस्कृति के पुनरूत्थान का समय आया है। आज पुनरूत्थान के काल में हम जी रहे हैं। राम मंदिर का भव्य निर्माण हुआ और अनुच्छेद 370 हटा। अभी हम लोग भारत माता को विश्व के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान होते देखेंगे।
स्वामी गोविंददेव गिरि ने कहा कि साहित्यकारों का सम्मान सरस्वती की प्रत्यक्ष पूजा है। दुनिया में जितने भी क्षेत्र हैं साहित्य का क्षेत्र सर्वोपरि है। उन्होंने कहा साहित्य चिरस्थायी प्रभाव डालता है। इसलिए उत्तम साहित्य का सृजन होनाा चाहिए। क्योंकि बोला हुआ शब्द तात्कालिक भाव डालता है और लिखा हुआ शब्द चिरस्थायी प्रभाव डालता है। सर्वोच्च साहित्य वही है जिससे लोगों का हित हो,जिसके कारण लोगों के मन में सदभाव व प्रेरणा जगे। राष्ट्रभक्तिपरक व लोकमंगलकारी साहित्य की रचना होनी चाहिए।
छह साहित्यकारों को किया गया सम्मानितभाऊराव देवरस सेवा न्यास की ओर से 31वें पंडित प्रताप नारायण मिश्र स्मृति युवा साहित्यकार सम्मान समारोह में विभिन्न विधाओं में छह साहित्यकारों को प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह व 25 हजार रूपये का चेक प्रदान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी गोविन्द देव गिरि के हाथों काव्य के विधा में बेगूसराय बिहार के राहुल शिवाय, बाल साहित्य में अलीगढ़ के शादाब आलम, कथा साहित्य में सोनभद्र की वंदना चौबे, संस्कृत में शाहजहांपुर की डा.दीपिका दीक्षित, पत्रकारिता में बिहार के सुपौल के अंशुमान झा और भूटिया भाषा से सिक्किम के डा जिग्मी वांग्चुक भूटिया को यह सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि किसी भी देश के लिए युवा प्राणवायु की तरह होते हैं। युवाओं की दिशा सही होगी तो 2047 तक विकसित भारत बनना तय है। कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण ने भाऊराव देवरस सेवा न्यास की गतिविधियों से परिचित कराया। न्यास के संयुक्त सचिव जितेन्द्र अग्रवाल ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन शिव सिंह ने किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचारक कौशल, विधायक ओपी श्रीवास्तव, संघ के सह प्रान्त सम्पर्क प्रमुख डा. हरनाम सिंह, विभाग कार्यवाह अमितेश और विभाग प्रचारक अनिल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन