भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में चार पुलिस अधिकारियों ने न्यायिक जांच आयोग के समक्ष दर्ज कराया बयान
पटना, 16 जुलाई (हि.स.)। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौंटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ प्रकरण की न्यायिक जांच गुरुवार को आगे बढ़ी। जगदीशपुर के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के दारोगा विकास कुमार तथा इंस्पेक्टर सह अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) संजीव कुमार न्यायिक जांच आयोग के समक्ष उपस्थित हुए और अपने-अपने बयान दर्ज कराए। चारों अधिकारियों ने आयोग के समक्ष घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपना पक्ष रखा तथा आयोग की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब दिए।
न्यायिक जांच आयोग मामले की परिस्थितियों, घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तार से पड़ताल कर रहा है। हालांकि शाहपुर थाना के दारोगा हरिचन्द्र कुमार किसी कारणवश आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हो सके। आयोग के सचिव सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गवाही की प्रक्रिया शुक्रवार को भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को लगभग दस गवाहों के बयान दर्ज किए जाने की संभावना है।
आयोग ने इस प्रकरण में एसडीओ, डीएसपी समेत कुल 15 पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों तथा पुलिसकर्मियों को समन जारी किया है। आयोग क्रमवार सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मियों से पूछताछ कर रहा है ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। जांच के दौरान जुटाए जा रहे दस्तावेज, साक्ष्य और गवाहों के बयान आयोग की अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इससे पहले 15 जुलाई तक पीड़ित पक्ष की ओर से भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी, पिता काशी नाथ तिवारी, भाई चंदन तिवारी तथा भाभी सुमन देवी सहित कुल नौ लोगों के बयान आयोग के समक्ष दर्ज किए जा चुके हैं। इन सभी गवाहों ने घटना से संबंधित अपने-अपने पक्ष और अनुभव आयोग के सामने रखे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि शेष गवाहों के बयान दूसरे चरण में दर्ज किए जाएंगे। सभी पक्षों की गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के अध्ययन के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगा।
इधर, भोजपुर पुलिस ने भरत तिवारी मुठभेड़ मामले से जुड़े फेसबुक अकाउंट के महत्वपूर्ण वीडियो हटाए जाने संबंधी वायरल खबरों का खंडन किया है। पुलिस अधीक्षक भोजपुर (आरा) कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि विभिन्न मीडिया माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया जा रहा है कि मामले से जुड़े फेसबुक अकाउंट से अहम वीडियो डिलीट कर दिए गए हैं और इसमें पुलिस की भूमिका है, जबकि यह दावा पूरी तरह भ्रामक और निराधार है।
पुलिस के अनुसार, मामले की निष्पक्ष जांच तथा डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संबंधित फेसबुक अकाउंट (आईडी) को सुरक्षित (प्रिजर्व) रखने के लिए विधिवत संबंधित नोडल प्राधिकारी को अनुरोध भेजा गया है। पुलिस ने कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ाई जा रही है और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी