अब बैंकों को बताना होगा कितने अनुसूचित जाति के लोगों को मिला कर्ज
नई दिल्ली, 07 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) की पहल के बाद अब बैंकों को यह बताना होगा कि सरकारी योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति के कितने लोगों को कर्ज और दूसरी आर्थिक मदद दी गई है।
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने इस बारे में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बैंकों को निर्देश जारी किए हैं।
एनसीएससी के सचिव विवेक कुमार देवांगन ने 24 सितंबर 2026 को वित्तीय सेवा विभाग के सचिव को पत्र लिखा था। उन्होंने बताया था कि बैंकों की रिपोर्ट में यह जानकारी नहीं दी जा रही थी कि सरकारी योजनाओं का कितना लाभ अनुसूचित जाति के लोगों को मिला।
इन योजनाओं में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, पीएम स्वनिधि, सीजीटीएमएसई और एमएसएमई ऋण जैसी योजनाएं शामिल हैं।
आयोग ने कहा था कि यह जानकारी जरूरी है। इससे पता चलेगा कि अनुसूचित जाति के लोगों को सरकारी योजनाओं का कितना फायदा मिल रहा है।
इसके बाद वित्तीय सेवा विभाग ने 5 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के संबंधित बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए।
अब बैंकों को
हर योजना के तहत अनुसूचित जाति के कितने लोगों को मदद मिली, इसकी जानकारी देनी होगी।
यह भी बताना होगा कि कुल लाभार्थियों में अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या और प्रतिशत कितना है।
यह जानकारी योजना और बैंक के हिसाब से अलग-अलग देनी होगी।
यह जानकारी नियमित रूप से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के साथ साझा करनी होगी।
9 अक्टूबर 2026 तक वित्तीय सेवा विभाग को कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने बुधवार को एक बयान में कहा कि बैंक और राज्य स्तरीय बैंकर समितियां अपनी रिपोर्ट में यह नहीं बता रही थीं कि मुद्रा लोन, स्टैंड-अप इंडिया, पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं का फायदा कितने प्रतिशत अनुसूचित जाति के लोगों को मिला। बिना इस आंकड़े के हम यह नहीं जान सकते कि एससी समुदाय को सही तरीके से मदद मिल रही है या नहीं। संविधान हमें यह जांचने का अधिकार देता है। इस पर वित्तीय सेवा विभाग ने तुरंत सभी राज्यों के एसएलबीसी को आदेश दिया कि अब से हर रिपोर्ट में साफ-साफ लिखें कि कितने एससी लोगों को और कितने प्रतिशत को इन योजनाओं का लाभ मिला।
यह जानकारी नियमित रूप से आयोग को भी भेजें। इसकी रिपोर्ट भी शीघ्रता से विभाग को दें।
-----------
हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी