बांधवगढ़ की बाघिन दहाड़ेगी राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिज़र्व में
उमरिया, 28 फ़रवरी (हि.स.)। मप्र के उमरिया जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व से एक युवा बाघिन को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिज़र्व के लिए रवाना किया गया है। लगभग साढ़े तीन वर्ष आयु की यह स्वस्थ बाघिन अब राजस्थान की धरती पर अपनी नई दहाड़ से वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक नई उम्मीद जगाएगी।
उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के बीट जगुआ, परिक्षेत्र पनपथा बफर क्षेत्र से इस बाघिन का चयन निर्धारित मापदंडों के आधार पर किया गया था। पिछले एक माह से कई बाघिनों की गहन निगरानी की जा रही थी। क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में रेस्क्यू दल, उपवन मंडल अधिकारियों एवं परिक्षेत्र अधिकारियों की उपस्थिति में विस्तृत चर्चा के बाद ट्रांसलोकेशन के लिए इस बाघिन को उपयुक्त पाया गया। 27 फरवरी को उप संचालक की मौजूदगी में वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी की टीम ने पूरी सतर्कता के साथ बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।
इसके बाद विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों ने उसका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में बाघिन पूर्णतः स्वस्थ पाई गई। आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रियाओं के तहत उसे रेडियो कॉलर पहनाया गया, ताकि भविष्य में उसकी गतिविधियों की वैज्ञानिक निगरानी की जा सके। साथ ही निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार जैविक सैंपल भी संकलित किए गए।
क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने शनिवार को बताया कि ट्रांसलोकेशन की पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संपन्न की गई। बाघिन को विशेष रूप से तैयार किए गए सुरक्षित पिंजरे में रखा गया और अनुभवी टीम की निगरानी में राजस्थान के लिए रवाना किया गया। रेस्क्यू के दौरान सहायक संचालक पनपथा, सहायक संचालक ताला, परिक्षेत्र अधिकारी पनपथा बफर, परिक्षेत्र अधिकारी ताला, परिक्षेत्र अधिकारी खितौली, डब्ल्यूसीटी संस्था के प्रतिनिधि सहित संबंधित स्टाफ मौजूद रहा। पूरी प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी और पेशेवर दक्षता के साथ अंजाम दिया गया।
बांधवगढ़ से राजस्थान की यात्रा के दौरान पन्ना टाइगर रिज़र्व के मडला में अल्प विराम लिया गया, जहां पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक श्री पटेल (आईएफएस) ने टीम से मुलाकात कर आवश्यक समन्वय किया। इसके बाद मुकुंदरा हिल टाइगर रिज़र्व प्रबंधन भी यात्रा में शामिल हो गया और संयुक्त रूप से बाघिन को उसके नए आवास तक पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। मुकुंदरा हिल टाइगर रिज़र्व में बाघों की संख्या बढ़ाने और आनुवंशिक विविधता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इस तरह के ट्रांसलोकेशन कार्यक्रम महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ और युवा बाघिन का स्थानांतरण न केवल वहां की बाघ आबादी को स्थिरता देगा, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन को भी मजबूती प्रदान करेगा। बांधवगढ़, जो देश-विदेश में बाघों की उच्च घनत्व वाली आबादी के लिए प्रसिद्ध है, समय-समय पर संरक्षण की दृष्टि से इस प्रकार के प्रबंधन कदम उठाता रहा है। इस सफल रेस्क्यू और ट्रांसलोकेशन से यह स्पष्ट होता है कि मध्यप्रदेश वन विभाग वन्यजीव संरक्षण के प्रति गंभीर और प्रतिबद्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र त्रिपाठी