राम मंदिर पर राजनीति बंद हो, राम मंदिर ट्रस्ट विहिप और संघ के साथ : संत समाज
- अयोध्या के संतों ने चम्पत राय को दिया क्लीन चिट, उनके निर्दोष होने पर जताया भरोसा- किसी के बहकावे में न आए हिन्दू, उन्हीं को चिंता है जो न्यायालय में श्रीराम को कहते थे काल्पनिक : महंत कमल नयन दास
अयोध्या, 23 जुलाई (हि.स.)। श्री राम जन्मभूमि में चढ़ावा राशि की गणना प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के बाद अयोध्या धाम संत मंडल के तत्वावधान में गुरुवार को संत समाज की एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी हुई। इस संगोष्ठी में संतों ने एक सुर में कहा कि राम मंदिर पर राजनीति बंद होनी चाहिए। सम्पूर्ण संत समाज श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, विहिप और संघ के साथ खड़ा है। संतों ने रामभक्तों से अपील किया कि किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है, यह उन्हीं को चिंता है जो न्यायालय में कहते थे कि 'श्रीराम' काल्पनिक हैं।
इस संगोष्ठी का आयोजन श्री राम सत्संग भवन, धर्म मंडपम् में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मंदिर की धार्मिक समिति के सदस्य श्री मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
उल्लेखनीय है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े हालिया घटनाक्रम और राम मंदिर में चढ़ावा गिनती प्रकरण में संतों की यह पहली बैठक हुई।
इस बैठक में अयोध्या के संत-महंतों ने एक स्वर से कहा कि राम मंदिर को बदनाम करने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है, जिसका संत समाज पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने कहा कि प्रकरण की जांच एसआईटी कर रही है और जो भी दोषी होगा, उसे कानून के अनुसार दंड अवश्य मिलेगा। वहीं, संतों ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय निर्दोष हैं तथा अयोध्या के संत समाज में उनका सम्मान पहले की तरह बना हुआ है।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे महंत कमलनयन दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म पर बहुत संकट आ गया है। समय आ गया है जो दूध का दूध पानी का पानी होगा। श्रीराम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी प्रयास को संत समाज स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
श्रीराम वल्लभाकुंज वेदांती मंदिर के अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि जो लोग राम मंदिर में चोरी की घटना को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत कर रहे हैं, वे राम मंदिर के हितैषी नहीं हैं। जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित की है,वे मंदिर की आलोचना नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि बीच में जो प्रश्न उठे थे,उनका उत्तर ट्रस्ट ने दे दिया है और संत समाज श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, विश्व हिंदू परिषद तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता हनुमानगढ़ी महंत संजय दास ने कहा कि राम मंदिर को राजनीति का विषय बनाना बंद होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संत समाज चंपत राय को दोषी नहीं मानता।
श्री हनुमत निवास के महंत मिथिलेशनंदिनी शरण ने कहा कि राम मंदिर में चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है,लेकिन इस घटना की आड़ में मंदिर को बदनाम करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाले लोग अयोध्या के वास्तविक साधु-संत नहीं हैं।
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महासचिव बजरंगलाल बांगड़ा ने कहा कि जो भी दोषी होगा,वह किसी भी स्थिति में नहीं बचेगा और निर्दोष व्यक्ति को कोई सजा नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद संत समाज के साथ मजबूती से खड़ी है।
महंत राघवेश दास ने कहा कि ट्रस्ट को चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार नहीं करना चाहिए। जैसे ही एसआईटी की रिपोर्ट आएगी और यदि वे निर्दोष सिद्ध होंगे तो उन्हें पुनः ट्रस्ट में सम्मानपूर्वक स्थान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के कुछ लोग राम मंदिर को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि चढ़ावे की गिनती में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसके दोषियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए। अयोध्या का संत समाज ट्रस्ट के प्रति अपना विश्वास व्यक्त करता है।
महंत रामदास ने कहा कि चढ़ावा प्रकरण में उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई से संत समाज संतुष्ट है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती,तब तक चंपत राय पर दोषारोपण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने डॉ.अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए।
श्रीराम आश्रम के महंत जयराम दास ने कहा कि जो लोग सनातन धर्म को बदनाम करने का कार्य कर रहे हैं,उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक उत्सवों में रामलला को सम्मिलित किया जाएगा।यदि चंपत राय दोषमुक्त सिद्ध होते हैं तो उन्हें पुनः ट्रस्ट में सम्मानपूर्वक स्थान मिलना चाहिए।
संकट मोचन हनुमान किला के महंत परशुराम दास ने कहा कि श्रीराम मंदिर की व्यवस्था में संत समाज का समुचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और राम मंदिर की गरिमा को धूमिल करने का कोई भी प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक में अयोध्याजी के सैकड़ों संत-महंत, आरएसएस एवं विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय