सूरत के 'भूतिया डिमोलिशन' पर आठवले की एंट्री, बोले- गरीबों का वोट मान्य है तो झोपड़ी अमान्य क्यों?
सूरत, 17 जून (हि.स.)। सूरत के वेड दरवाजा स्थित चंद्रशेखर आजाद ब्रिज के पास करीब 60 वर्ष पुरानी नासीरनगर बस्ती में हाल ही में किए गए डिमोलिशन का विवाद अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने बुधवार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सूरत महानगर पालिका आयुक्त से तत्काल बातचीत करने का आश्वासन दिया और सवाल उठाया कि, यदि गरीबों का वोट मान्य है तो उनकी झोपड़ी अमान्य क्यों है?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता असलम साइकिलवाला ने इस पूरी कार्रवाई को बिल्डर और अधिकारियों की सुनियोजित साजिश तथा भूतिया डिमोलिशन बताते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी को एक विस्तृत पत्र भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सूरत एसओजी के डीसीपी राजदीपसिंह नकुम ने जनरल डायर जैसी भूमिका निभाई है और उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है।
सूरत दौरे पर आए केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने डिमोलिशन कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा कि संविधान के अनुसार रोटी, कपड़ा और मकान उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले श्रमिकों ने अपनी मेहनत से शहरों को बसाया है और ऊंची-ऊंची इमारतों के निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि चुनावों के दौरान झुग्गी बस्तियों में रहने वाले गरीब नागरिकों का वोट वैध माना जाता है तो फिर कानून के नाम पर उनके घरों को अवैध कैसे घोषित किया जा सकता है? बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए लोगों को बेघर करना मानवता के खिलाफ है।
महाराष्ट्र की एसआरए योजना जैसी व्यवस्था लागू करने की दी सलाह
आठवले ने सूरत महानगरपालिका को मुंबई की स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) योजना की तर्ज पर पुनर्वास नीति लागू करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में वर्ष 2011 से पहले की झुग्गियों को कानूनी मान्यता प्राप्त है और यदि उन्हें हटाना हो तो पहले वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराना अनिवार्य है। मुंबई में बिल्डर गरीब परिवारों को लगभग 300 वर्गफुट कार्पेट एरिया का पक्का मकान मुफ्त में देकर शेष भूमि पर परियोजना विकसित करते हैं।
असलम साइकिलवाला का मुख्यमंत्री को पत्र
कांग्रेस नेता असलम साइकिलवाला ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कानून-व्यवस्था के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 30 मई 2026 को सुबह करीब 9 बजे डीसीपी राजदीपसिंह नकुम अपनी टीम और नगर निगम अधिकारियों के साथ नासिरनगर पहुंचे और वहां रहने वाले गरीब मुस्लिम श्रमिक परिवारों को तत्काल मकान खाली करने के लिए दबाव बनाया गया।
मतदान केंद्र में बिल्डर और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
साइकिलवाला ने आरोप लगाया कि 26 अप्रैल 2026 को नगर निगम चुनाव के मतदान दिवस पर नासिरनगर भूमि की मूल मालिक पारसी महिला गुलबेन फराम के वकील धीरूभाई चलियावाला को बिल्डर संजय लाखाणी मतदान केंद्र तक लेकर आए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि मतदान केंद्र में केवल अधिकृत कर्मचारी और मतदाताओं को ही प्रवेश की अनुमति होती है, फिर बिल्डर को वहां प्रवेश कैसे मिला? उन्होंने इसे प्रशासन और बिल्डर के बीच कथित सांठगांठ का प्रमाण बताया।
डीसीपी नकुम के निलंबन और सीट जांच की मांग
कांग्रेस नेताअसलम साइकिलवाला ने पत्र में कहा कि पिछले 17-18 दिनों से नासिरनगर के गरीब परिवारों के साथ हुए कथित अन्याय के कारण सरकार, पुलिस और महानगर पालिका की छवि प्रभावित हुई है। उन्होंने मांग की कि 30 मई के डिमोलिशन से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो तथा पिछले तीन वर्षों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच कराई जाए।
उन्होंने डीसीपी राजदीपसिंह नकुम को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने तथा वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में स्वतंत्र एसआईटी गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस पत्र की प्रतियां गृह विभाग के सचिव, गुजरात के डीजीपी तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के निदेशक को भी भेजी गई हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे