असम-नागालैंड सीमा क्षेत्रों में तेल एवं गैस दोहन का मार्ग प्रशस्त, केंद्र और दोनों राज्यों के बीच त्रिपक्षीय समझौता
नई दिल्ली, 11 जून (हि.स.)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में गुरुवार को केंद्र, असम और नागालैंड सरकार के बीच असम-नागालैंड सीमा क्षेत्रों में खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस के अन्वेषण और दोहन को सुगम बनाने के लिए एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस मौके पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा मौजूद रहे।
इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि देश आज एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि यह समझौता आने वाले समय में इतिहास में दर्ज किया जाएगा और इससे तेल, प्राकृतिक गैस तथा अन्य खनिज संसाधनों के दोहन की व्यापक संभावनाएं खुलेंगी।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समृद्ध और विकसित पूर्वोत्तर क्षेत्र का जो विजन रखा है, यह समझौता उसे साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि असम और नागालैंड ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए यह तय किया कि सीमा संबंधी मुद्दे देश के ऊर्जा संसाधनों के उपयोग में बाधा नहीं बनेंगे और दोनों राज्य 50-50 हिस्सेदारी के मॉडल पर सहमत हुए हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि यह समझौता सहकारी संघवाद (कोऑपरेटिव फेडरलिज्म) का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने नागालैंड सरकार के उस निर्णय का स्वागत किया, जिसके तहत राज्य ने केवल छह क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय पूरे प्रदेश में तेल एवं गैस की खोज के लिए भी सहमति जताई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में संबंधित क्षेत्रों में प्रतिदिन 1,000 से 1,500 बैरल उत्पादन क्षमता है, जिसे इस समझौते के बाद दस गुना से अधिक बढ़ाया जा सकता है। शाह ने कहा कि अकेले एक क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी की संभावना है। यदि नागालैंड के तेल और गैस भंडारों का पूर्ण उपयोग किया जाए तो भारत इस क्षेत्र में विदेशी स्रोतों पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है।
अमित शाह ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे विवादों और कानूनी अड़चनों के कारण दोनों राज्यों के आर्थिक विकास पर असर पड़ रहा था, लेकिन इस समझौते से विकास का नया मार्ग खुलेगा। उन्होंने कहा कि नागालैंड में उपलब्ध तेल और प्राकृतिक गैस संसाधनों का दोहन देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, वहीं असम और नागालैंड के आर्थिक विकास के लिए भी नए अवसर पैदा करेगा।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति और विकास का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि क्षेत्र में पर्यटन, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफस्पा) का दायरा लगातार घटा है और वर्तमान में पूर्वोत्तर का 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र इससे मुक्त हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि एक-दो राज्यों को छोड़कर अगले वर्ष पूरे पूर्वोत्तर से अफस्पा को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में प्रगति होगी।
गृह मंत्री ने कहा कि यह समझौता केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में खनिज संसाधनों के दोहन और क्षेत्रीय विकास के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत भी देता है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार