ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ‘अष्टलक्ष्मी दर्शन’ कार्यक्रम में किया संवाद, पूर्वोत्तर की विविधता से प्रभावित हुए छात्र
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (हि.स.)। केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ‘अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा विनिमय कार्यक्रम’ के प्रतिभागियों से वर्चुअल संवाद किया। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गोवा और दिल्ली से आए छात्रों ने पूर्वोत्तर भारत की यात्रा के अपने अनुभव साझा किए। मंत्रालय की इस पहल का उद्देश्य युवाओं के बीच सांस्कृतिक समझ, भावनात्मक जुड़ाव और एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करना है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने बताया कि सिंधिया ने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने-अपने राज्यों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के राजदूत बनें और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की दृष्टि के अनुरूप यह कार्यक्रम युवाओं को पूर्वोत्तर की असली संस्कृति और परंपराओं से जोड़ता है।
मंत्रालय ने बताया कि यह संवाद में छात्रों ने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति और आतिथ्य ने उन्हें गहराई से प्रभावित करेगा। छत्तीसगढ़ की रागिनी साहू ने कहा कि ऐसे अनुभव आधारित भ्रमण छात्रों के लिए बेहद मूल्यवान हैं। हरिश कुमार साहू ने कहा कि यात्रा के बाद उन्हें समझ आया कि पूर्वोत्तर को ‘अष्टलक्ष्मी’ क्यों कहा जाता है। दिल्ली की इफराह कावा ने क्षेत्र की मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक समृद्धि की सराहना की।
मध्यप्रदेश की शैली तिवारी ने एयरफोर्स स्टेशन और असम राइफल्स के अधिकारियों से मुलाकात, टेरेस फार्मिंग और बांस के घरों को देखने का अनुभव साझा किया। राजस्थान के विकास बाली ने कहा कि पूर्वोत्तर की प्राकृतिक सुंदरता और विविधता को देखकर उनका अनुभव बेहद यादगार रहा।
गोवा की दीक्षा डी गोंकार ने स्थानीय भोजन और लोगों की आत्मीयता को विशेष बताया। गोवा के छात्रों ने असमिया भाषा में गीत प्रस्तुत कर सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रदर्शन भी किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर