आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल में किया सरेंडर
जोधपुर, 28 मई (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले के बाद आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया है। आसाराम के जोधपुर आने की सूचना पर एयरपोर्ट पर उसके समर्थकों की भीड़ लग गई। इस दौरान पुलिस को आसाराम को एयरपोर्ट से निकाल कर गाड़ी में बैठाने के लिए कड़ी मशक्कत हुई।
आसाराम जोधपुर एयरपोर्ट से सीधे पाल गांव स्थित अपने आश्रम पहुंचा। वहां से एम्स गया और जांच के बाद सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। बुधवार को उच्च न्यायालय की जोधपुर मुख्यपीठ ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए अंतरिम जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट की ओर से तत्काल गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश के बाद आसाराम बुधवार देर शाम ही हरिद्वार से दिल्ली के लिए रवाना हो गया था। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने जब आसाराम की अपील खारिज करते हुए उसकी अंतरिम जमानत को रद्द किया, उस समय वह उत्तराखंड के हरिद्वार में था। कोर्ट का फैसला आने और तत्काल गिरफ्तारी वारंट जारी होने की जानकारी मिलने के बाद आसाराम सड़क मार्ग से हरिद्वार से दिल्ली के लिए रवाना हो गया था।
आसाराम के समर्थकों का दावा है कि सड़क मार्ग से सफर के चलते तबीयत बिगड़ गई। इसी वजह से दिल्ली एम्स ले जाया गया। सूत्रों की मानें तो आसाराम पक्ष की कोशिश यही थी कि सरेंडर नहीं करना पड़े और उच्चतम न्यायालय में अपील होने तक मेडिकल ग्राउंड का बहाना बना ले लेकिन कानूनी जानकारों से राय मशवरा करने के बाद यह विचार त्याग दिया गया।
उच्च न्यायालय के जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने इस चर्चित मामले में अपना विस्तृत फैसला सुनाया था। कोर्ट ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई उम्रकैद (प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक जेल में रहने) की सजा को पूरी तरह से बरकरार रखा था। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि दोषी की कैद की तो दीवारें हैं लेकिन पीड़िता को जो मानसिक आघात और आजीवन पीड़ा दी गई है, उसकी कोई दीवार नहीं है। इसी आदेश के तहत कोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत रद्द कर तुरंत गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिए थे।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में मामले के दो अन्य सह आरोपितों हॉस्टल वार्डन शिल्पी और गुरुकुल के निदेशक शरत चंद्र को राहत देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने माना था कि इन दोनों सह-आरोपितों के खिलाफ आपराधिक साजिश में शामिल होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है।
अगस्त 2013 में जोधपुर के मनई आश्रम में कुटिया के अंदर एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था, जिसमें निचली अदालत ने अप्रैल 2018 में दोषियों को सजा सुनाई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सतीश