पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाया जाना इस बार स्वतंत्रता दिवस को खास बना गया : अमित शाह

 


सिलीगुड़ी, 21 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि देश की आजादी और विभाजन के बाद लंबे समय तक कुछ लोगों ने ‘वंदे मातरम्’ को पूरे मन से स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि संसद में इस गीत को गाया जाता था और सभी लोग सम्मान में खड़े होते थे, लेकिन आजादी के बाद भी इसका पूरा संस्करण नहीं गाया जाना उन्हें हमेशा खलता रहा।

अमित शाह ने यह बात दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने जवानों से संवाद किया और सिलीगुड़ी में कई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस का समारोह उनके लिए खास रहा। शाह ने बताया कि 2014 से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब भी लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं, वह वहां मौजूद रहे हैं। लेकिन इस बार 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह अलग रहा, क्योंकि पहली बार पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।

गृह मंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना करने वाले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को याद करते हुए कहा कि इस रचना ने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी, बल्कि स्वतंत्र भारत की कल्पना को भी दिशा दी। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी रचना के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि स्वतंत्र भारत कैसा होना चाहिए।

सीमा सुरक्षा और सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन आवंटन के मुद्दे पर अमित शाह ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पद संभालने के बाद सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन आवंटन का लंबे समय से लंबित काम तेजी से आगे बढ़ा है। राज्य सरकार अब तक इसके लिए 1,129 एकड़ जमीन आवंटित कर चुकी है।

अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार उनसे सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया था, लेकिन उनकी अपील पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य से भाजपा के लिए नहीं, बल्कि देश की सीमा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए जमीन मांग रही थी।

इस अवसर पर अमित शाह ने प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि भी दी। उन्होंने बिस्मिल्लाह खान से जुड़ा एक प्रसंग साझा करते हुए कहा कि जब उनसे पूछा गया था कि संसद, राष्ट्रपतियों के सामने और बड़े आयोजनों में शहनाई बजाने के बाद उन्हें सबसे अधिक खुशी कहां मिलती है, तो उन्होंने गंगा के किनारे सुबह काशी विश्वनाथ की मौजूदगी में शहनाई बजाने को सबसे बड़ा आनंद बताया था।---------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर