अमित शाह ने एनसीडीसी के लिए 25 साल का रोडमैप बनाने का दिया निर्देश, पूर्वोत्तर में 8 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य

 


नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के लिए अगले 25 वर्षों का व्यापक रोडमैप तैयार करने का निर्देश देते हुए गुरुवार को कहा कि सहकारी क्षेत्र का प्रशासन पेशेवर होना चाहिए, जबकि उसका दृष्टिकोण सहकारिता के मूल सिद्धांतों पर आधारित रहना चाहिए।

शाह ने यहां एनसीडीसी की 93वीं महापरिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के ढांचे, वित्तीय संसाधन जुटाने, कामकाज में सुधार और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं की समीक्षा के लिए सहकारिता क्षेत्र के अनुभवी प्रतिनिधियों तथा पेशेवर विशेषज्ञों का समूह गठित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण के अनुरूप सहकारिता को विकास का ऐसा सशक्त माध्यम बनाना है, जिसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद से 25 अक्टूबर तक एनसीडीसी ने देशभर की सहकारी संस्थाओं को कुल 4.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित की है। वित्त वर्ष 2025-26 में निगम ने 1,27,596 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की, जबकि इस दौरान उसका शुद्ध लाभ 1,475 करोड़ रुपये रहा। निगम की ऋण वसूली दर 99.84 प्रतिशत रही और उसका शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) स्तर शून्य दर्ज किया गया।

शाह ने पिछले करीब पांच वर्षों में एनसीडीसी की प्रगति की सराहना करते हुए इस अवधि को निगम के लिए एक तरह का ‘स्वर्णिम काल’ बताया। उन्होंने कहा कि निगम ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी मौजूदगी स्थापित की है। लद्दाख और पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में कार्यालयों का विस्तार सहकारिता आंदोलन को देश के अंतिम छोर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि एनसीडीसी को अपनी उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि बदलती जरूरतों के अनुरूप संस्थागत सुधार, वित्तीय संसाधन जुटाने की क्षमता और सहकारी संस्थाओं के साथ साझेदारी के नए मॉडल विकसित करने चाहिए। उन्होंने 31 मार्च 2027 के बाद इस विषय पर विशेष बैठक आयोजित कर विस्तृत चर्चा करने और दिसंबर 2027 तक आवश्यक निर्णयों की दिशा में प्रगति करने का सुझाव दिया।

गृह मंत्री ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से छोटे किसानों, पशुपालकों, मछुआरों, ग्रामीण महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सामूहिक शक्ति को राष्ट्रीय विकास से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि एनसीडीसी की जिम्मेदारी केवल बड़ी सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता देना नहीं बल्कि छोटे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों की आजीविका में प्रत्यक्ष सुधार लाना भी है।

शाह ने वर्ष 2030 तक पूर्वोत्तर क्षेत्र को पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष सहकारी परियोजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल होने से पूर्वोत्तर की आय में करीब 32,800 करोड़ रुपये की वृद्धि हो सकती है और लगभग आठ लाख रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने क्षेत्र में एनसीडीसी के कार्यालयों को राज्य सरकारों के सहयोग से व्यावहारिक परियोजनाएं तैयार करने और उनके लिए वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

उन्होंने एनसीडीसी को राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राज्य सहकारी बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों के साथ मिलकर ऋण उपलब्ध कराने के साझा मॉडल विकसित करने का भी सुझाव दिया। शाह ने कहा कि डेयरी सहकारी क्षेत्र की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए नए वित्तपोषण मॉडल विकसित करना आवश्यक है।

शाह ने कहा कि वित्तीय सहायता वितरण में तेजी लाने के लिए एनसीडीसी को वित्त वर्ष 2026-27 में 1.70 लाख करोड़ रुपये, 2027-28 में 2.10 लाख करोड़ रुपये और 2028-29 में 2.50 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने आगे के वर्षों के लिए भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने का सुझाव दिया। उन्होंने वित्त वर्ष 2029-30 और 2030-31 में करीब 3.50 लाख करोड़ रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता वितरित करने की दिशा में प्रयास करने पर जोर दिया।

बैठक में एनसीडीसी के वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय प्रदर्शन, वार्षिक लेखा और रिपोर्ट की समीक्षा की गई। निगम ने इस अवधि में 1,55,408 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इन परियोजनाओं से 14,881 सहकारी समितियों को लाभ पहुंचाने का प्रावधान किया गया। वित्त वर्ष 2020-21 में निगम का वार्षिक वित्तीय वितरण 24,733 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,27,596 करोड़ रुपये हो गया।

शाह ने राष्ट्रीय स्तर की बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के गठन और विकास में एनसीडीसी की भूमिका की भी सराहना की। इनमें राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी जैविक लिमिटेड, भारत टैक्सी, सहकार सारथी और शहरी सहकारी बैंकों का शीर्ष संगठन एनयूसीएफडीसी शामिल हैं। उन्होंने सहकारी चीनी मिलों के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था पर आधारित नए कारोबारी मॉडल विकसित करने और ‘सहकार मित्र’ कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप पूरी करने वाले युवाओं को नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया।

बैठक में एनसीडीसी संशोधन अधिनियम, 2026 और ‘सहकार नवाचार योजना’ पर भी चर्चा हुई। इस योजना के तहत पात्र सहकारी समितियों को 25 लाख रुपये तक की 100 प्रतिशत अनुदान सहायता देने का प्रावधान है। अब तक पांच सहकारी समितियों को कुल 85 लाख रुपये की अनुदान सहायता मंजूर की जा चुकी है। निगम ने सहकारी क्षेत्र में 1,863 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का पंजीकरण किया है, जिनमें 1,117 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के माध्यम से गठित किए गए हैं। अक्टूबर 2026 तक एफपीओ और संबंधित संस्थाओं को 356.90 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

शाह ने एनसीडीसी के अधिकारियों, सामान्य परिषद के सदस्यों और कर्मचारियों को वित्तीय प्रदर्शन तथा संस्थागत विस्तार के लिए बधाई देते हुए विश्वास जताया कि निगम अपनी वित्तीय क्षमता और पेशेवर कार्यप्रणाली को मजबूत करके ग्रामीण समृद्धि, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता के माध्यम से ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार