कृत्रिम बुद्धिमत्ता ‘पहाड़ी मवेशियों’ पर नजर रख सकती है, मिथुन के व्यवहार का हो रहा अध्य्यन

 


नई दिल्ली, 08 सितंबर (हि.स.)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता ‘पहाड़ी मवेशियों’ पर नजर रख सकती है और यह किसानों के अपने झुंडों की निगरानी करने के तरीके को बदल सकती है। इसी क्रम में नागालैंड स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने मिथुन के व्यवहार की वास्तविक समय में पहचान और निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली विकसित की है। यह तकनीक पशुओं के स्वास्थ्य, कल्याण, पोषण, प्रजनन और प्रबंधन में उपयोगी साबित हो सकती है। अध्ययन ‘इंजीनियरिंग रिसर्च एक्सप्रेस’ में प्रकाशित हुआ है।

शोध के लिए केंद्र के फार्म में 12 उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, जो दिन-रात निगरानी के साथ रात में अवरक्त दृश्य भी उपलब्ध कराते हैं। वैज्ञानिकों ने 3,000 चित्रों का आंकड़ा तैयार किया, जिनमें मिथुन के चार प्रमुख व्यवहार—खाना, खड़ा होना, लेटना और प्रजनन के दौरान चढ़ना—को चिह्नित किया गया। प्रणाली में व्यवहार की पहचान के लिए योलोवी8एन और अलग-अलग पशुओं की पहचान बनाए रखने के लिए डीपसॉर्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

योलोवी8एन मॉडल ने 99.5 प्रतिशत औसत सटीकता और 99.6 प्रतिशत रिकॉल हासिल किया। एनवीडिया आरटीएक्स 3060 पर यह प्रणाली लगभग 31 फ्रेम प्रति सेकंड की गति से काम करती है। इसे पशुओं के आंशिक रूप से छिपे होने, पृष्ठभूमि में अव्यवस्था, गीली या असमान जमीन, छाया, गति से धुंधले दृश्य और रात के अवरक्त फुटेज जैसी परिस्थितियों में भी परखा गया।

उल्लेखनीय है कि मिथुन पूर्वोत्तर भारत के जनजातीय समुदायों के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पशु है। वैज्ञानिकों के अनुसार भोजन, खड़े रहने और लेटने के व्यवहार में बदलाव स्वास्थ्य या शारीरिक स्थिति में परिवर्तन का संकेत दे सकते हैं, जबकि चढ़ने के व्यवहार से प्रजनन और मद चक्र की निगरानी में मदद मिल सकती है।

फिलहाल प्रणाली का परीक्षण एक ही फार्म पर हुआ है। भविष्य में अलग-अलग क्षेत्रों, मौसमों और फार्मों में परीक्षण के साथ आक्रामकता, साफ-सफाई और बीमारी से जुड़ी निष्क्रियता जैसे अन्य व्यवहारों की पहचान भी जोड़ी जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा