महिलाओं की नज़र से एआई की नई तस्वीर : आईजीएनसीए में 'इंडिया'ज एआई थ्रू हर लेंस' पुस्तक का लोकार्पण

 




- नीति आयोग जल्द शुरू करेगा 'एआई फॉर हर' कार्यक्रम- तकनीक जीवन को सरल बनाने के साथ समाज को नई दिशा भी देती हैः अर्जुनराम मेघवाल

नई दिल्ली, 10 जुलाई (हि.स.)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) केवल तकनीकी क्रांति का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक बदलाव और विकसित भारत के निर्माण का भी प्रभावी उपकरण बन रही है। इसी सोच को केंद्र में रखकर इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में शुक्रवार को 'इंडिया'ज एआई थ्रू हर लेंस' पुस्तक का भव्य लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि तकनीक जहां जीवन को सरल बनाती है, वहीं यह समाज को नई दिशा भी देती है। यह पुस्तक बताती है कि किस प्रकार एआई आम महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है और विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।

लोकार्पण के दौरान अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारत आज इंडस्ट्री 4.0 के दौर में तेजी से आगे बढ़ रहा है और एआई इस परिवर्तन का प्रमुख आधार बन चुका है। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी नवाचार को नई दिशा दे रही है और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को गति प्रदान कर रही है। उनके अनुसार यह पुस्तक केवल तकनीकी विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताती है कि एआई किस प्रकार समाज के अंतिम व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं के जीवन में बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 की झलक इस पुस्तक के विचारों में स्पष्ट दिखाई देती है।

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण ऐलान नीति आयोग की वरिष्ठ सलाहकार एवं वूमेन एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म (डब्ल्यूईपी) की प्रमुख अन्ना रॉय ने किया। उन्होंने बताया कि नीति आयोग जल्द ही 'एआई फॉर हर' कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की आवश्यकताओं और समस्याओं को ध्यान में रखकर एआई आधारित समाधान विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि आज भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता में जेंडर बायस एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने अमेज़न के उस चर्चित उदाहरण का उल्लेख किया, जिसमें एआई आधारित भर्ती प्रणाली महिलाओं के बायोडाटा को स्वतः अलग कर रही थी। अन्ना रॉय ने कहा कि यदि समाज में असमानता मौजूद है तो वहीं पूर्वाग्रह एआई के डेटा में भी दर्ज हो जाते हैं। इसलिए जिम्मेदार और समावेशी एआई विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि निमिषा झा की यह पुस्तक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानन्द जोशी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल तकनीकी विषय के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसका सीधा संबंध समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों से भी है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच मनुष्य की रचनात्मकता और स्मृति पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एआई किसी पारंपरिक व्यंजन की नई रेसिपी तैयार कर सकता है तो यह सुविधा स्वागतयोग्य है, लेकिन हमारी माताओं और दादियों के अनुभवों, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एआई के अवसरों के साथ-साथ उसके संभावित खतरों को समझना भी जरूरी है।

आईजीएनसीए के डीन प्रो. (डॉ.) रमेश सी. गौर ने स्वागत भाषण में कहा कि जब कोई पुस्तक आईजीएनसीए से प्रकाशित या लोकार्पित होती है तो यह अपने आप में गंभीर बौद्धिक विमर्श का विषय होती है। उन्होंने बताया कि ज्ञान, संस्कृति और नई प्रौद्योगिकी के बीच संवाद स्थापित करना संस्थान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इस अवसर पर आईजीएनसीए के विद्यानिधि डिजिटल पुस्तक पोर्टल का भी अनावरण किया गया। उन्होंने बताया कि संस्थान ने अपनी अधिकांश पुस्तकों का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण कर दिया है।

पुस्तक की लेखिका निमिषा झा ने कहा कि इस पुस्तक का उद्देश्य भारत में एआई के क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के अनुभवों, संघर्षों और उपलब्धियों को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि अक्सर उनसे पूछा जाता है कि क्या भारत एआई के लिए तैयार है, जबकि उनका मानना है कि भारत पहले से ही एआई के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यूपीआई का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने तकनीक को जीवन का हिस्सा बना लिया है। हालांकि उन्होंने यह भी चेताया कि यदि समाज में असमानताएं मौजूद रहेंगी तो वही असंतुलन एआई के डेटा और निर्णयों में भी दिखाई देगा। इसलिए तकनीकी विकास के साथ सामाजिक समानता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अतिरिक्त सचिव राधिका चक्रवर्ती ने कहा कि यह पुस्तक केवल तकनीक की नहीं, बल्कि जेंडर, अधिकारों और सरकारी नीतियों के व्यापक विमर्श की पुस्तक है। उन्होंने एक घरेलू महिला का उदाहरण देते हुए बताया कि एआई ने किस प्रकार उसके दैनिक कार्यों को आसान बनाया और उसके जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन सहित लगभग हर क्षेत्र में एआई का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। इससे आम नागरिकों का जीवन अधिक सरल और सुविधाजनक हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि निमिषा झा की यह पुस्तक महिलाओं के सशक्तिकरण और तकनीक में उनकी भागीदारी पर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को आगे बढ़ाएगी तथा समाज के सभी वर्गों के लिए उपयोगी साबित होगी।

यह कार्यक्रम आईजीएनसीए के कला निधि प्रभाग और सिनर्जी बुक्स इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, नीति आयोग में वूमेन एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म (डब्ल्यूईपी) की वरिष्ठ सलाहकार एवं प्रमुख अन्ना रॉय,आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानन्द जोशी, डीन प्रो. (डॉ.) रमेश सी. गौर, राष्ट्रीय महिला आयोग की अतिरिक्त सचिव राधिका चक्रवर्ती तथा पुस्तक की लेखिका एवं वरिष्ठ सिविल सेवक निमिषा झा सहित अनेक शिक्षाविद, शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, लेकिन 'इंडिया'ज एआई थ्रू हर लेंस' और 'एआई फॉर हर' की घोषणा ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अगला चरण महिलाओं की भागीदारी, समानता और समावेशी विकास पर केंद्रित होने जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सौरव राय