कॉर्पोरेट सीएसआर से खेत तक रिसर्च पहुंचाने का रोडमैप तैयार, कृषि क्षेत्र को स्टार्टअप, स्किलिंग और एग्रीटेक से मिलेगी ताकत

 


नई दिल्ली, 15 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रिसर्च लैब तक सीमित न रहे बल्कि “विज्ञान से किसान तक” का पुल बने, ताकि जलवायु अनुकूल खेती, मृदा स्वास्थ्य, पोषण-सुरक्षित भोजन, कृषि कौशल विकास और महिला किसानों की उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में सीएसआर निवेश से वास्तविक जमीन स्तर पर बदलाव दिखे।

पूसा में बुधवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा आयोजित “कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) कॉन्क्लेव 2026” को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के तहत वैज्ञानिकों को किसान के बीच जाकर नई कृषि पद्धतियों, नई किस्मों और अनुसंधान की जानकारी देने का लक्ष्य रखा गया। उन्होंने कहा कि “विज्ञान से किसान तक” की यात्रा तेज करनी होगी और इसमें कॉर्पोरेट जगत का सहयोग निर्णायक हो सकता है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहले रेशा निकालने के लिए 25 दिन तक पानी में भिगोकर रखना पड़ता था, जिससे कई जगह पानी की कमी और खराब क्वालिटी की समस्या आती है, जबकि टेक्नोलॉजी के उपयोग से अब ऐसी मशीनें विकसित हुई हैं जो कम समय में बेहतर रेशा निकालने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी मशीनों का जल्दी से जल्दी कमर्शियलाइजेशन हो, ताकि किसान तक यह तकनीक पहुंचे, यह काम अकेला सरकारी सेक्टर नहीं कर सकता, इसमें प्राइवेट सेक्टर की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

कॉन्क्लेव के दौरान रखे गए पाँच विषयों की चर्चा करते हुए कहा कि कृषि को जलवायु अनुकूल बनाना, मृदा स्वास्थ्य बचाना, किसानों की आय और स्वास्थ्य दोनों को सुरक्षित करना और पोषण- समृद्ध, ऋतु–अनुकूल भोजन की संस्कृति को बढ़ाना, आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन घटने, बिना परीक्षण के उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से हो रही क्षति पर चिंता जताई और कहा कि मिट्टी बचेगी तो भूस भी बचेगा इसलिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसे प्रयासों को सीएसआर के माध्यम से और मजबूत किया जा सकता है।

शिवराज सिंह ने सीएसआर के माध्यम से कृषि को स्ट्रेंथन करने के कई रास्ते गिनाए– एग्री–टेक स्टार्टअप्स को समर्थन, खेती से जुड़े ट्रेनिंग संस्थानों को सहयोग, ड्रोन पायलटों की क्षमता निर्माण, एग्री–बिजनेस लीडर्स और फूड प्रोसेसर तैयार करने जैसे क्षेत्रों में निवेश का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कई बार युवा अगर अच्छा अवसर मिले तो खेती छोड़ना नहीं चाहते बल्कि आधुनिक कृषि और एग्री–उद्यमिता को अपनाना चाहते हैं; सीएसआर इन युवाओं को नए मौके दे सकता है।

महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों की चर्चा करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ड्रोन दीदी से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के एसएचजी आज कृषि–आधारित उत्पादों में नई क्रांति करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से आग्रह किया कि महिला किसानों, महिला समूहों और ग्रामीण उद्यमिता को सीएसआर योजनाओं में खास स्थान दिया जाए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ और मजबूत हो। उन्होंने याद दिलाया कि कानून के तहत 2 प्रतिशत सीएसआर का प्रावधान है, पर इसे सिर्फ कानूनी बाध्यता नहीं बल्कि समाज के प्रति नैतिक धर्म समझना चाहिए। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी तथा वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी