राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर अधिवक्ताओं ने जताया विरोध, संसद में नया प्रस्ताव लाने पर विचार की सलाह

 


नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित मार्च पर ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. आदीश सी. अग्रवाल ने आपत्ति जताई है। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मार्च वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव डालने के बजाय मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संसद में नया प्रस्ताव लाने पर विचार करना चाहिए।

रविवार को राहुल गांधी को लिखे पत्र में डॉ. अग्रवाल ने कहा कि विपक्षी नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाल कर भारत के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा के लिए उचित नहीं है। इससे न्यायालय में लंबित मामलों की स्वतंत्र सुनवाई पर अनुचित राजनीतिक दबाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को राजनीतिक दबाव और बाहरी हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त रखा जाना चाहिए।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देने का निर्देश देने या उन्हें पद से हटाने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। चुनाव आयोग के किसी फैसले या कार्रवाई को चुनौती देने का उचित रास्ता सक्षम न्यायिक पीठ के समक्ष कानूनी प्रक्रिया के तहत मामला उठाना है, न कि मुख्य न्यायाधीश को राजनीतिक ज्ञापन सौंपना।

उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का पद सर्वोच्च संवैधानिक सम्मान और जनता के विश्वास का प्रतीक है। इसलिए इस पद की गरिमा, स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिनके तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को पद से हटाया जाता है। इसके लिए लोकसभा में कम-से-कम 100 या राज्यसभा में कम-से-कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव को प्रारंभिक स्तर पर स्वीकार करना और आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना अलग-अलग चरण हैं। प्रस्ताव स्वीकार किए जाने के बाद निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत तीन सदस्यीय जांच समिति आरोपों की जांच करती है। इसके बाद ही संसद में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी कांग्रेस और इंडी गठबंधन के अन्य दलों के सांसदों का समर्थन जुटाकर नया प्रस्ताव लाने की पहल कर सकते हैं। उनके अनुसार, नए दस्तावेजी साक्ष्य सामने आने के बाद संसद में उपलब्ध संवैधानिक प्रक्रिया पर विचार करना अधिक उचित होगा।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठाने और जवाबदेही की मांग का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है लेकिन इसके साथ न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करना भी जरूरी है।

डॉ. अग्रवाल ने राहुल गांधी से 12 अक्टूबर का प्रस्तावित मार्च वापस लेने और नए साक्ष्यों के आधार पर संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नया प्रस्ताव लाने पर विचार करने का आग्रह किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी