सूरत एसबीआई लूटकांड में मास्टरमाइंड एलेक्स का साथी बिहार से गिरफ्तार, लूट के पैसों से घूमता रहा हरिद्वार-ऋषिकेश और केदारनाथ

 


सूरत, 15 जून (हि.स.)। सूरत के वराछा क्षेत्र स्थित एसबीआई बैंक में 27 अप्रैल 2026 को हुई करीब 50 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। ज़ोन-1 की जांच टीम ने तकनीकी विश्लेषण और स्थानीय सूत्रों की मदद से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सैयदपुर क्षेत्र से आरोपी रोहित कुमार रूपे सिंह राठौड़ को गिरफ्तार कर लिया है। वह इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड के मास्टरमाइंड एलेक्स उर्फ अखिलेश कुमार गांधी का करीबी सहयोगी बताया जा रहा है।

सूरत डीसीपी आलोक कुमार ने बताया कि लूट की पूरी साजिश अत्याधुनिक तकनीक के सहारे रची गई थी। एलेक्स और रोहित के बीच बातचीत केवल सिग्नल ऐप के जरिए होती थी। पुलिस की निगरानी से बचने के लिए दोनों अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त वीपीएन का उपयोग करते थे, ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।

हजीरा में रहकर की थी बैंक की रेकी

पुलिस जांच में सामने आया है कि एलेक्स ने रोहित को बिहार से भरूच बुलाया था। वहां से वह अपने साथी प्रिंस के साथ सूरत के हजीरा क्षेत्र पहुंचा, जहां उसके पिता एक कंपनी में काम करते हैं। दोनों आरोपितों ने हजीरा में तीन दिन रुककर वराछा स्थित एसबीआई बैंक की रेकी की और लूट की पूरी योजना तैयार की।

करोड़ों की लूट का था इरादा

लूट के दिन एलेक्स और उसके साथी बैंक में घुसे थे। आरोपितों का मकसद बैंक के बड़े लॉकर को तोड़कर करोड़ों रुपये की लूट को अंजाम देना था, लेकिन समय की कमी और तकनीकी बाधाओं के कारण वे लॉकर नहीं तोड़ सके। इसके बाद उन्होंने बैंक में मौजूद नकदी लेकर फरार होने का फैसला किया।

प्राइवेट बसों से दिल्ली तक भागे

लूट के बाद आरोपी भरूच पहुंचे, जहां रोहित उनसे मिला। इसके बाद रोहित लूट की रकम लेकर एलेक्स के साथ अहमदाबाद गया। पुलिस की नाकेबंदी से बचने के लिए आरोपितों ने प्राइवेट ट्रैवल्स की बसों का सहारा लिया और अहमदाबाद से जयपुर होते हुए दिल्ली पहुंच गए।

यात्रा के दौरान एलेक्स ने रोहित को एक नीले रंग का बैग दिखाकर बताया था कि उसमें एसबीआई बैंक से लूटी गई रकम रखी हुई है।

हिस्से में मिले 1.30 लाख रुपये

दिल्ली पहुंचने के बाद गैंग के सदस्य अलग-अलग हो गए। एलेक्स ने रोहित को तत्काल खर्च के लिए 1.30 लाख रुपये दिए और बाद में बड़ा हिस्सा देने का वादा किया। साथ ही उसने सिग्नल ऐप के जरिए एक बैंक खाता नंबर भेजकर उसमें रकम जमा कराने को कहा।

रोहित ने 1.30 लाख रुपये में से 90 हजार रुपये ‘शुभम’ नाम के खाते में ट्रांसफर कर दिए, जिसे क्राइम ब्रांच ने ट्रेस कर रिकवर कर लिया है। बाकी 40 हजार रुपये में से उसने 25 हजार रुपये खर्च कर दिए, जबकि 15 हजार रुपये नकद पुलिस ने उसके कब्जे से बरामद किए हैं।

पुलिस से बचने के लिए पहुंचा धार्मिक स्थलों पर

लूट के बाद रोहित पुलिस से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदलता रहा। वह दिल्ली से हरिद्वार, फिर ऋषिकेश और उसके बाद केदारनाथ पहुंचा। इसी दौरान उसने लूट की रकम से करीब 25 हजार रुपये खर्च कर दिए। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के समय बचे हुए 15 हजार रुपये जब्त कर लिए।

बिहार में भी दर्ज हैं गंभीर मामले

डीसीपी आलोक कुमार के अनुसार प्रारंभिक जांच में पता चला है कि रोहित बिहार का आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ एनडीपीएस और प्रोहिबिशन एक्ट समेत कई गंभीर मामलों में पहले से आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद है।

उन्होंने बताया कि बिहार पुलिस की जिला इंटेलिजेंस यूनिट (DIU), स्थानीय एसपी और प्रोबेशनर आईपीएस अधिकारियों के सहयोग से यह कार्रवाई सफल हो सकी। पुलिस का कहना है कि सिग्नल ऐप और वीपीएन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करने के बावजूद आरोपित कानून के शिकंजे से नहीं बच सके। मामले में फरार अन्य आरोपितों की तलाश जारी है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की संभावना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे