शैक्षिक विसंगतियों और शहरी नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष हेतु अभाविप प्रतिबद्ध: डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी
-पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित
भुवनेश्वर, 27 मई (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की एक-दिवसीय केंद्रीय कार्यसमिति बैठक बुधवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित ‘शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान’ विश्वविद्यालय में संपन्न हुई। बैठक में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने शिक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, युवाओं की भूमिका, सामाजिक-आर्थिक विषयों और संगठनात्मक विस्तार सहित समसामयिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। इस दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा, भय और तुष्टिकरण की राजनीति के विरुद्ध लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के समर्थन में अभिनंदन प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया गया।
बैठक में वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थितियों, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, युवाओं की भागीदारी, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा संगठनात्मक समीक्षा पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यसमिति बैठक में अभाविप द्वारा संचालित विभिन्न अभियानों और कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। इनमें ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम अभियान’, ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’, ‘छात्रावास सर्वेक्षण अभियान’, ‘प्राध्यापक यशवंतराव केलकर जन्मशती वर्ष’, ‘आपातकाल निषेध के 50 वर्ष’, ‘श्री गुरु तेगबहादुर बलिदान दिवस के 350 वर्ष’ तथा ‘संत शिरोमणि रविदास जी के 650वें प्राकट्योत्सव’ जैसे विषय प्रमुख रहे।
बैठक में इन अभियानों को अधिक प्रभावी और जनसरोकारों से जोड़ने पर बल दिया गया। साथ ही कार्यक्रमों के अनुवर्तन और संगठनात्मक विस्तार की दिशा में विशेष रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में “हिंसा, भय और तुष्टिकरण की राजनीति को परास्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनः स्थापना के लिए पश्चिम बंगाल के जनमानस का अभिनंदन” विषयक प्रस्ताव पारित किया गया।
प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। इस प्रस्ताव के माध्यम से पश्चिम बंगाल की जनता द्वारा लोकतांत्रिक व्यवस्था के समर्थन में दिए गए जनादेश का स्वागत किया गया।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी ने कहा कि संगठन की भावी दिशा तय करने के लिए पिछले कार्यों का मूल्यांकन और वर्तमान परिस्थितियों का गंभीर अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि द्वारका और श्रृंगेरी में आयोजित संगठनात्मक विचार बैठकें व्यवस्था को मजबूत बनाने में मील का पत्थर सिद्ध हुई हैं।
उन्होंने कहा कि अभाविप भारतीय दर्शन और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था की पक्षधर है। ऐसी शिक्षा प्रणाली युवाओं के सर्वांगीण विकास के साथ एक समग्र और एकीकृत राष्ट्र निर्माण में सहायक होगी।
राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि वर्तमान समय में भारत वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में अभाविप शिक्षा में व्याप्त विसंगतियों और शहरी नक्सलवाद जैसी चुनौतियों के विरुद्ध संघर्षरत है।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना में छात्रवृत्ति आंदोलन, नीट पेपर लीक मामला, मुंबई में परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन तथा दिल्ली और पंजाब विश्वविद्यालयों में छात्रसंघों के माध्यम से किए गए नवाचार अभाविप की सक्रिय भूमिका को दर्शाते हैं।
डॉ. सोलंकी ने बताया कि त्रिपुरा में जनजातीय छात्र सम्मेलन, ओडिशा में छात्रा संसद, तमिलनाडु में विधि छात्र सम्मेलन तथा ‘मिशन साहसी’ अभियान के अंतर्गत दस लाख से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान करना संगठन की बढ़ती स्वीकार्यता और विस्तार का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि यह बैठक कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टि प्रदान करेगी, जिससे वे राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक गति के साथ आगे बढ़ा सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो