केले पकाने वाले 25 केंद्र बिना लाइसेंस संचालित, एफएसडीए की प्रदेशव्यापी जांच में खुली पोल

 

311 राइपनिंग चैंबरों का निरीक्षण, 132 से अधिक प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस

15 हजार से अधिक मूल्य के पांच क्विंटल से ज्यादा घटिया केले नष्ट कराए गए

राइपनिंग चैंबरों में साफ-सफाई, फलों के रखरखाव और इस्तेमाल में लाई जा रही ट्रे की स्वच्छता की हुई जांच

लखनऊ, 14 अक्टूबर। प्रदेश में फलों को पकाने की प्रक्रिया में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने केले पकाने वाले केंद्रों के खिलाफ व्यापक जांच अभियान चलाया। प्रदेशभर में कुल 311 राइपनिंग चैंबरों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान 25 प्रतिष्ठान बिना वैध खाद्य लाइसेंस के संचालित होते पाए गए। अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करते हुए 132 से अधिक प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किए। वहीं, गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले पांच क्विंटल से अधिक केले नष्ट कराए गए।

अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने राइपनिंग चैंबरों में साफ-सफाई, फलों के रखरखाव, इस्तेमाल में लाई जा रही ट्रे की स्वच्छता और विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुपालन की जांच की। इस दौरान कई केंद्रों पर स्वच्छता की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। गंदगी, बिना साफ की गई ट्रे और परिसर के रखरखाव में लापरवाही जैसी कमियां सामने आईं। खाद्य पदार्थों को पकाने और भंडारित करने वाले केंद्रों पर स्वच्छता के मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित संचालकों को सुधार के निर्देश दिए गए।

20 नमूने लेकर जांच के लिए भेजे

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता की जांच के लिए कुल 20 नमूने एकत्र किए। इन नमूनों की जांच के जरिए खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन का आकलन किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान पांच क्विंटल से अधिक घटिया गुणवत्ता वाले केले नष्ट कराए गए। नष्ट किए गए केलों का मूल्य 15 हजार रुपये से अधिक था।

बिना लाइसेंस कारोबार करने वालों पर कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत खाद्य कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए आवश्यक लाइसेंस या पंजीकरण संबंधी प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। इसके बावजूद निरीक्षण में 25 प्रतिष्ठान बिना वैध खाद्य लाइसेंस के संचालित होते पाए गए। ऐसे प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इसके अतिरिक्त 132 से अधिक प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किए गए, ताकि वे पाई गई कमियों को दूर कर निर्धारित मानकों के अनुरूप कारोबार करें।

केले पकाने की प्रक्रिया में भी जरूरी है सावधानी

व्यावसायिक स्तर पर केले पकाने के लिए एथिलीन गैस का नियंत्रित परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाता है। इसके विपरीत कैल्शियम कार्बाइड से निकलने वाली एसिटिलीन गैस का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत प्रतिबंधित है। एथेफोन भी पौधों में फल पकाने की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला एक रसायन है, जिसका उपयोग संबंधित नियमों और अनुमतियों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के दौरान इस्तेमाल होने वाले पदार्थों, उपकरणों और परिसर की स्वच्छता का विशेष महत्व है। गलत रसायनों का इस्तेमाल, गंदे उपकरण और अस्वच्छ परिस्थितियां उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। ऐसे में राइपनिंग चैंबरों का नियमित निरीक्षण और निर्धारित मानकों का पालन जरूरी है।