यूरोपीय संसद पहली बार 2 ट्रिलियन यूरो का दीर्घकालिक बजट कर सकती है खारिज : रिपोर्ट
ब्रसेल्स,29 सितंबर (हि.स./रिया नाेवाेस्ती)। यूरोपीय संसद अपने इतिहास में पहली बार यूरोपीय संघ (ईयू) के लगभग 2 ट्रिलियन यूरो (2.26 ट्रिलियन डॉलर) के दीर्घकालिक बजट को खारिज कर सकती है। 'रैपोर्टर' अखबार ने मामले से जुड़े लोगों के हवाले से मंगलवार को यह रिपोर्ट दी है। अखबार के अनुसार ब्लॉक के नेताओं की सहमति के बावजूद इस बजट ने सदस्य देशों और राजनीतिक समूहों के बीच गंभीर मतभेद पैदा कर दिए हैं।
बेल्जियम के पूर्व वित्त मंत्री जोहान वैन ओवरटवेल्ड्ट ने 'रैपोर्टर' से कहा, संसद की सहमति को हल्के में नहीं लिया जा सकता... मुझे लगता है कि वे अभी उन समस्याओं को कम करके आंक रहे हैं जो संसद की सहमति पाने में आ सकती हैं।
यूरोपीय संसद ने पहले कभी भी ब्लॉक के नेताओं द्वारा तय किए गए ईयू के लॉन्ग-टर्म बजट पर हुए समझौते को खारिज नहीं किया है। हालांकि, इसे मंज़ूरी देने के लिए पूर्ण बहुमत की ज़रूरत होती है, जिसके लिए कम से कम 361 वोटों की आवश्यकता होती है।
वैन ओवरटवेल्ड्ट ने कहा कि यूरोपीय संसद में बढ़ते बंटवारे के कारण ज़रूरी वोट हासिल करना और मुश्किल हो गया है।
'रैपोर्टर' की रिपोर्ट के अनुसार, नए बजट के आकार को लेकर भी अतिरिक्त मतभेद हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय संसद यूरोपीय आयोग के प्रस्ताव की तुलना में बजट बढ़ाने की मांग कर रही है, जबकि जर्मनी, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड और अन्य आर्थिक रूप से सतर्क देश कई सौ अरब यूरो की कटौती पर ज़ोर दे रहे हैं।
यूरोपीय संसद के भीतर भी विवाद जारी हैं, खासकर कृषि फंडिंग को लेकर। अखबार के मुताबिक, एक साल से ज़्यादा की बातचीत के बाद भी सांसद इस मुद्दे पर किसी आम सहमति पर नहीं पहुँच पाए हैं।
एक अज्ञात ईयू राजनयिक ने 'रैपोर्टर' को बताया कि दिसंबर में समझौता हो जाना प्रक्रिया का अंत नहीं है।
उन्होंने आगे कहा, अगला कदम संसद के साथ संकट का होगा।
ईयू नेताओं का लक्ष्य 2028-2034 के लिए लगभग 2 ट्रिलियन यूरो के लॉन्ग-टर्म बजट पर 2026 के अंत तक सहमति बनाना है। इसे अपनाने के लिए यूरोपीय संसद की मंज़ूरी की ज़रूरत होगी। साथ ही, विपक्षी राजनीतिक ताकतों ने, जो 2027 में इस ब्लॉक के सबसे बड़े देशों में चुनाव जीत सकती हैं, पहले ही कह दिया है कि वे यूरोपीय आयोग को विवादित बजट को उसके मौजूदा रूप में अपनाने नहीं देंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी