ईरान की सैन्य प्रतिरोध क्षमता काफी हद तक निष्प्रभावी: इज़राइली राजदूत
नई दिल्ली, 16 मार्च (हि.स.)। इज़राइल ने आज कहा कि अमेरिकी एवं इज़राइली सेनाओं ने खाड़ी के अन्य देशों के साथ समन्वय से ईरान की सैन्य प्रतिरोध की क्षमताओं को काफी हद तक निष्प्रभावी कर दिया है और जल्द ही हम अपने लक्ष्य हासिल कर लेंगे।
भारत में इज़राइल के राजदूत रूवेन अज़ार ने सोमवार को मीडिया के साथ बातचीत में ईरान के खिलाफ इज़राइल के हालिया सैन्य विकल्पों के समय के बारे में बात की और माना कि ईरान को लेकर क्षेत्रीय अस्थिरता पहले ही बन गई थी लेकिन हमला करने का ऑपरेशनल अवसर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़राइल का दौरा पूरा करने के बाद आया।
अज़ार ने कहा, यह स्पष्ट था कि प्रधानमंत्री मोदी के आने से पहले भी हमारे क्षेत्र में स्थिति बहुत अस्थिर थी। जब हमला करने का फैसला किया गया, तो ऑपरेशनल अवसर प्रधानमंत्री मोदी के जाने के बाद ही आया। ऑपरेशन को मंज़ूरी देने का कैबिनेट का फैसला उसके ठीक दो दिन बाद हुआ।
रूवेन अजार ने कहा, हमें विश्वास है कि हमने ईरानी शासन की सैन्य मशीनरी को काफी हद तक निष्प्रभावी कर दिखाया है। अमेरिका और इज़राइल एक संयुक्त प्रयास के माध्यम से ईरान के नौसैनिक बलों, वायु सेना और उनके रक्षा उत्पादन क्षमता को लगभग शून्य के स्तर पर ले आये हैं। हमने जवाबी कार्रवाई करने और मिसाइलों को लॉन्च करने की उनकी क्षमता को भी कम कर दिया है। वे अब एक दिन में लगभग 10 बैराज फायर कर रहे हैं, जो युद्ध की शुरुआत की तुलना में बहुत कम है। जब तक यह चलता रहता है, हमारी एकमात्र सीमा मौसम है। जब तक आसमान साफ है, हम ईरान के ऊपर आसमान को नियंत्रित करना जारी रखेंगे और इसकी क्षमताओं को और कम करेंगे।
इज़राइली राजदूत ने कहा, इससे खाड़ी क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने की ईरान की क्षमता भी कम हो गई है। हम हवाई रक्षा पर अमेरिका और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ समन्वय कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि न केवल इजरायल बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र को प्रतिशोध के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान की जाए। हम पहले की धमकियों से आश्चर्यचकित नहीं थे, हम जानते थे कि ईरान के पास ऐसी क्षमताएं हैं, लेकिन हम उन्हें बेअसर करने में काफी हद तक सफल रहे हैं।
राजदूत ने अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर भारत के रुख के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत सरकार के कूटनीतिक संतुलन के बावजूद दोनों देश अपना जुड़ाव जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा, हम भारत के साथ अपना जुड़ाव बनाये रखेंगे। हमारे बहुत सारे साझा हित हैं। हम जानते हैं, भारत उन कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाएगा जो भारत के हितों की पूर्ति करते हैं।
अज़ार ने कहा कि इज़राइल को ईरान की ओर से जवाबी हमलों की आशंका थी, लेकिन दावा किया कि अब जो नुकसान हुआ है, वह पहले के हमलों की तुलना में कम गंभीर है।
उन्होंने कहा, हमें कोई हैरानी नहीं हुई। हम जानते थे कि ईरानियों के पास ये क्षमताएं हैं। जून में हमने ईरानियों की क्षमताओं को कमज़ोर कर दिया था और अब वे इज़राइल को जो नुकसान पहुंचा रहे हैं, वह जून में किए गए नुकसान से कहीं कम है।
उन्होंने ईरान पर क्षेत्र के कई देशों पर हमला करके स्थिति को और बिगाड़ने का आरोप लगाया।
अज़ार ने कहा, उन्होंने क्षेत्र के 12 देशों पर हमला करके स्थिति को और बिगाड़ने का फैसला किया। मुझे लगता है कि यह पूरी तरह से गैर-ज़िम्मेदाराना है। दबाव उन्हीं पर है और उन्हीं पर बना रहेगा, क्योंकि वे ही हमलावर हैं। उन्होंने कहा कि सौभाग्य से भारत के राजनयिक प्रयासों की बदौलत, दो एलपीजी जहाज पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य से आगे बढ़ चुके हैं। उन्हें यकीन है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए अपनी मजबूत कूटनीतिक क्षमताओं का प्रयोग करेगा।
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बारे में ऑनलाइन फैली अफवाहों और अटकलों का जवाब देते हुए अज़ार ने कहा कि ऑनलाइन गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नेतन्याहू जीवित हैं। जब मैं इज़राइल में था, तो मैंने उन्हें एक से ज़्यादा बार खुद अपनी आँखों से देखा था। ...ऑनलाइन बहुत सारी गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
अज़ार ने ईरान के साथ संघर्ष में इज़राइल के घोषित उद्देश्यों के बारे में कहा, “लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हमने शुरू में ही यह साफ़ कर दिया था कि हमारे तीन लक्ष्य हैं- परमाणु खतरे को खत्म करना, बैलिस्टिक मिसाइल के खतरे को खत्म करना और ईरान के अंदर दमनकारी ताकतों को निष्प्रभावी करके ईरानी लोगों को अपना भविष्य तय करने का अवसर देना।”
उन्होंने कहा,
“हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस युद्ध के समाप्त होने के बाद ईरानी शासन इन योजनाओं को फिर से न बना सके।” यह पूछे जाने पर कि क्या इज़राइल ईरान के नवनियुक्त सर्वोच्च नेता को निशाना बनाएगा, उन्होंने कहा, हमारे नेताओं ने कहा है कि इस विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया