इजरायल के आगामी संसदीय चुनावाें में दमखम से उतरेंगे बेंजामिन नेतन्याहू
तेल अवीव, 10 जून (हि.स./आरआईए नोवोस्ती)। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू देश में आगामी सितंबर में हाेने वाले संसदीय चुनावों में भाग लेंगे जिन्हें हमास और हिज्बुल्लाह जैसी इस्लामिक हिंसक समूहाें और उनके आका ईरान के खिलाफ सीधा माेर्चा लेने की रणनीति पर चलने का पूरा फायदा मिलने का भराेसा है।
इजरायल में सत्तारूढ लिकुड पार्टी के एक सूत्र ने बुधवार को आरआईए नोवोस्ती काे यह जानकारी दी। सूत्र ने कहा, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आगामी चुनावों में निश्चित रूप से भाग लेंगे।
बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा नेसेट के आगामी चुनावों में उतरने की घोषणा इजरायल के इतिहास के सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण दौर में हुई है। यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक और नेतन्याहू के राजनीतिक जीवन के लिए निर्णायक माना जा रहा है। अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा किए गए हमलों और उसके बाद गाजा, लेबनान एवं ईरान के साथ चले लंबे सैन्य संघर्षों के बाद इजरायल में यह पहला आम चुनाव होने जा रहा है। विश्लेषक इस चुनाव को नेतन्याहू की सुरक्षा नीतियों और युद्ध प्रबंधन पर जनता का 'जनमत संग्रह' के रूप में देख रहे हैं।
बहुमत के संकट और गठबंधन की राजनीति के दाैर में आगामी चुनावाें के पहले जनमत सर्वेक्षणाें में नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है, लेकिन उनके वर्तमान दक्षिणपंथी और धार्मिक गठबंधन को सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में जरूरी 61 सीटों का स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल दिख रहा है। वर्ष 2025 में कुछ सहयोगी दलों के हटने के बाद से उनकी सरकार बेहद मामूली बहुमत पर टिकी हुई है।
इस समय इजरायल में सबसे बड़ा घरेलू विवाद 'कट्टर-रूढ़िवादी' यहूदियों को सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट को लेकर है। देश का एक बड़ा वर्ग लंबे समय से चल रहे युद्ध के बीच सभी के लिए समान सैन्य सेवा की मांग कर रहा है, जबकि नेतन्याहू के गठबंधन सहयोगी धार्मिक दल इस छूट को बनाए रखने पर अड़े हैं।
इस बार नेतन्याहू को पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और याइर लैपिड के नए राजनीतिक गठबंधनों से कड़ी चुनौती मिल रही है। इसके अलावा, नेतन्याहू पर चल रहे भ्रष्टाचार के अदालती मामले और युद्ध से प्रभावित हुई देश की अर्थव्यवस्था भी विपक्ष के बड़े मुद्दे हैं।
उल्लेखनीय है कि 76 वर्षीय बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक (कुल 18 वर्ष से अधिक) प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले नेता हैं। इस घोषणा के बाद यह साफ हो गया है कि वे अपनी राजनीतिक विरासत को बचाने और सत्ता में बने रहने के लिए एक बार फिर पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतरेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया