यमन की सेना का मोखा बंदरगाह पर कब्जा, बाब अल-मंदाब की ओर बढ़ी
सना, 10 सितंबर (हि.स.)। यमन में जारी संघर्ष के बीच गुरुवार को बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया। यमन की सेना ने लाल सागर के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया। इसके साथ ही सेना ने बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य की ओर अपनी बढ़त तेज कर दी है।
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के अनुसार, मोखा पर कब्जे की पुष्टि सऊदी समर्थित मीडिया और सैन्य सूत्रों ने भी की है। सूत्रों के मुताबिक, सऊदी समर्थित लड़ाकों को शहर से पीछे हटना पड़ा। मोखा के हाथ से निकलने को तटीय मोर्चे पर सऊदी समर्थित बलों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
मोखा पर कब्जे से पहले यमनी सेना, जिसमें अंसारुल्लाह की टुकड़ियां भी शामिल हैं, ने पश्चिमी तट पर कई इलाकों में तेजी से बढ़त बनाई। हुदैदाह प्रांत के हेस और अल-खवखा जिलों पर भी यमनी सेना ने कब्जा कर लिया।
हुदैदाह के गवर्नर अब्दुल्ला अतिफी के अनुसार, दोनों जिलों को सऊदी समर्थित लड़ाकों से पूरी तरह खाली करा लिया गया, जिसके बाद मोखा की ओर आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ।
इससे कुछ घंटे पहले दक्षिण-पश्चिमी ताइज़ प्रांत के तटीय शहर याख्तुल पर भी यमनी सेना ने भीषण संघर्ष के बाद कब्जा कर लिया था। याख्तुल, हेस, अल-खवखा और फिर मोखा पर लगातार कब्जे ने सऊदी समर्थित बलों की तटीय रक्षा व्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पीछे हट रहे सऊदी समर्थित लड़ाकों ने दावा किया कि यमनी सेना ने लाल सागर में रणनीतिक हनिश द्वीप समूह पर भी हमले शुरू कर दिए हैं। इससे बाब अल-मंदाब की ओर जाने वाले समुद्री रास्तों पर यमनी सेना की पकड़ मजबूत होने की आशंका बढ़ गई है।
इस बीच यमनी सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने दावा किया कि देश की वायु रक्षा इकाइयों ने हज्जा प्रांत के ऊपर एक सऊदी संचालित वेस्टेल करायल निगरानी ड्रोन को मार गिराया। ड्रोन को उस समय सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से निशाना बनाया गया, जब वह कथित तौर पर इलाके में निगरानी अभियान चला रहा था।
यमनी सेना की बढ़त रोकने के लिए सऊदी सैन्य विमानों द्वारा यमन के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए जाने का भी दावा किया गया है। यमन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘साबा’ के अनुसार, गुरुवार को चार प्रांतों में करीब 40 हवाई हमले किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, अल-जौफ़ प्रांत के अल-हज़्म और अल-घायल जिलों में 10, मारिब के अल-जुबाह में तीन और ताइज़ प्रांत के मौज़ा, मकबाना, मोखा जंक्शन समेत विभिन्न इलाकों में 18 हमले किए गए। हुदैदाह प्रांत में अल-सलिफ, अल-तुहायता और कमरान द्वीप पर भी नौ हमले किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इन हवाई हमलों के बावजूद मोखा पर यमनी सेना का कब्जा नहीं रोका जा सका।
मोखा पर कब्जे और बाब अल-मंदाब की ओर यमनी सेना की बढ़त का रणनीतिक महत्व बेहद बड़ा है। बाब अल-मंदाब यमन और अफ्रीकी तट पर स्थित जिबूती तथा इरिट्रिया के बीच मौजूद एक संकरा समुद्री मार्ग है। यह लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश-निकास द्वार है।
यह मार्ग स्वेज नहर के जरिए यूरोप और भूमध्यसागर तक पहुंचने वाले तेल, ईंधन और अन्य वैश्विक व्यापारिक माल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस क्षेत्र पर किसी एक पक्ष की मजबूत सैन्य पकड़ से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
यमन में मौजूदा संघर्ष का बड़ा चरण मार्च, 2015 में शुरू हुआ था, जब सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में सैन्य अभियान शुरू किया। लंबे युद्ध में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत हुई और देश का बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ। साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम के बाद अग्रिम मोर्चों पर लड़ाई में काफी कमी आई थी लेकिन स्थायी राजनीतिक समाधान हासिल नहीं हो सका।
अब मोखा और पश्चिमी तट पर यमनी सेना की ताजा सैन्य बढ़त ने क्षेत्रीय तनाव को फिर बढ़ा दिया है। खासकर बाब अल-मंदाब की दिशा में आगे बढ़ने से यह संघर्ष केवल यमन तक सीमित न रहकर लाल सागर की समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी