यूएई के फुजैराह बंदरगाह पर ईरानी हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ा

 


कुवैत/वाशिंगटन, 16 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र फुजैराह बंदरगाह पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद आग लगने की घटना ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। हमले को यूएई की हवाई रक्षा प्रणाली ने बीच में ही रोक लिया, लेकिन गिरे मलबे से बंदरगाह के औद्योगिक क्षेत्र में आग लग गई और तेल लोडिंग के कुछ काम रोकने पड़े। यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका एवं इजराइल द्वारा ईरान के खर्ग द्वीप स्थित सैन्य ठिकानों पर किए गए हमले के बाद पूरे क्षेत्र में सैन्य टकराव और तेज हो गया है।

अमेरिका की न्यूयार्क पाेस्ट एवं अन्य मीडिया रिपाेर्ट के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र फुजैराह बंदरगाह के पास ड्रोन हमले के बाद आग लगने की घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है और इसका असर क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति तथा वैश्विक तेल बाज़ार पर भी पड़ने लगा है।

दो दिन पहले शनिवार को यूएई की हवाई रक्षा प्रणाली ने एक संदिग्ध ड्रोन को फुजैराह बंदरगाह के ऊपर ही मार गिराया। ड्रोन के गिरने के बाद उसके मलबे से आग लग गई, जिसके कारण तेल से जुड़े कुछ औद्योगिक क्षेत्रों के ऊपर काले धुएँ के घने गुबार उठते हुए दिखाई दिए। इस घटना के बाद एहतियात के तौर पर बंदरगाह पर तेल लोडिंग के कई काम अस्थायी रूप से रोक दिए गए।

यूएई सरकार के मीडिया कार्यालय ने बताया कि हमले को समय रहते रोक लिया गया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा कि मलबे से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

फुजैराह बंदरगाह यूएई के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह बंदरगाह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है और यहां से यूएई के मुरबान कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा निर्यात किया जाता है। अनुमान है कि यहां से प्रतिदिन लगभग 10 लाख बैरल तेल दुनिया के विभिन्न देशों को भेजा जाता है, जो वैश्विक तेल मांग का लगभग एक प्रतिशत है। इस वजह से यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला क्षेत्र में चल रहे सैन्य टकराव से जुड़ा हुआ हो सकता है। हाल ही में अमेरिका ने ईरान के खर्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है और माना जाता है कि देश के लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात इसी द्वीप से होते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी सेनाओं ने वहाँ मौजूद कई सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।

इस कार्रवाई के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और चेतावनी दी कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहे तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों और उनके सहयोगियों को निशाना बना सकता है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के अधिकारियों ने कहा कि वे उन सभी तेल, ऊर्जा और आर्थिक ढांचों को लक्ष्य बना सकते हैं जिनका संबंध अमेरिका से है या जो अमेरिका के साथ सहयोग कर रहे हैं।

ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने यूएई में रहने वाले लोगों से भी अपील की कि वे बंदरगाहों, गोदियों और उन इलाकों को खाली कर दें जहां अमेरिकी सैन्य गतिविधियां हो सकती हैं। उनका दावा है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हमलों के लिए यूएई के कुछ ठिकानों का इस्तेमाल किया है।

इस बीच, क्षेत्र में हमलों की एक शृंखला भी देखने को मिली है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान की ओर से कुवैत की दिशा में दो ड्रोन भेजे गए, जिनमें से एक ने अहमद अल-जाबेर हवाई अड्डे को नुकसान पहुँचाया और कुवैती सेना के तीन जवान घायल हो गए। कुवैत की हवाई सुरक्षा प्रणाली ने तीन अन्य ड्रोन को भी मार गिराया।

उधर इराक की राजधानी बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर भी एक हमले से दहल गया। यह हमला दूतावास के हेलीपैड क्षेत्र को निशाना बनाकर किया गया था। हालांकि इस हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन ने तुरंत नहीं ली, लेकिन इससे पहले अमेरिकी दूतावास ने इराक के लिए उच्च स्तर का सुरक्षा अलर्ट जारी किया था, जिसमें ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों से संभावित हमलों की चेतावनी दी गई थी।

तनाव केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। ईरान की राजधानी तेहरान में भी हाल ही में जोरदार धमाका हुआ, जिसमें इज़राइल द्वारा किए गए हवाई हमले में एक प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र को निशाना बनाया गया। इज़राइली रक्षा बलों का कहना है कि इस केंद्र में सैन्य उपग्रहों से जुड़े अनुसंधान और विकास का काम होता था, जिनका उपयोग निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जाता था।

इन घटनाओं के बीच वैश्विक तेल बाजार में भी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के कुल तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा प्रदान करता है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते से ही वैश्विक ऊर्जा व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि कई देश मिलकर इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजने पर विचार कर रहे हैं, ताकि तेल टैंकरों की आवाजाही जारी रह सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देश भी इस प्रयास में शामिल होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में सैन्य टकराव इसी तरह बढ़ता रहा, तो इससे न केवल मध्य-पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल फुजैराह बंदरगाह पर लगी आग को नियंत्रण में कर लिया गया है, लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा अवसंरचना कितनी संवेदनशील और जोखिम में है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी