एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म आतंकवाद की क्षमता को बढ़ा रहे हैं : संयुक्त राष्ट्र प्रमुख

 




- एंटोनियो गुटेरेस ने चेताया, आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने की जरूरत

न्यूयॉर्क, 29 जून (हि.स.)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोमवार को चेतावनी देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीकें आतंकवादी संगठनों की क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा रणनीति के जरिए ही इस चुनौती का प्रभावी मुकाबला किया जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित आतंकवाद-रोधी उच्चस्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गुटेरेस ने कहा कि दक्षिण एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में कई आतंकवादी संगठन अब भी सक्रिय हैं और वे क्षेत्रीय तथा वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि हिंसक उग्रवाद, नस्लवाद, विदेशी विरोधी मानसिकता तथा धर्म या आस्था के नाम पर फैलाए जा रहे कट्टरपंथी विचार कई देशों के लिए गंभीर घरेलू खतरा बनते जा रहे हैं।

गुटेरेस ने कहा कि आतंकवादी संगठन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल माध्यमों और मानव रहित हथियार प्रणालियों जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन तकनीकों ने उनकी भर्ती, वित्तपोषण और हमलों की योजना बनाने की क्षमता को पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत कर दिया है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यही तकनीकें आतंकवाद से मुकाबले में भी प्रभावी साबित हो सकती हैं। इनके माध्यम से संभावित खतरों की समय रहते पहचान, अवैध वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी और कट्टरपंथ के कारणों को समझने में मदद मिल सकती है।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि वर्ष 2024 में अपनाए गए ‘पैक्ट फॉर द फ्यूचर’ और ‘ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट’ के तहत सदस्य देशों ने डिजिटल तकनीकों का उपयोग मानव कल्याण और वैश्विक हित में करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

गुटेरेस ने कहा कि दुनिया इस समय अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। युद्ध, ऊर्जा संकट, महंगाई, खाद्य असुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और विस्थापन जैसी परिस्थितियां आतंकवादी संगठनों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं।

उन्होंने कहा, “गरीबी, अस्थिरता और अविश्वास की परिस्थितियां आतंकवाद के पनपने के लिए उपयुक्त जमीन तैयार करती हैं, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता।”

संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद-रोधी मामलों के कार्यवाहक अवर महासचिव अलेक्जेंडर जूएव ने भी कहा कि आतंकवादी संगठन राजनीतिक अस्थिरता, प्रशासनिक कमजोरियों, सामाजिक-आर्थिक असमानताओं और नई तकनीकों का लाभ उठाकर अपनी पहुंच और संसाधनों का विस्तार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद की रोकथाम और उससे मुकाबले की प्राथमिक जिम्मेदारी सदस्य देशों की है, लेकिन इस लड़ाई में संयुक्त राष्ट्र, क्षेत्रीय संगठन, नागरिक समाज, शिक्षाविद, युवा, महिलाएं और आतंकवाद से प्रभावित लोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय